रांची, 2 अप्रैल . झारखंड प्रदेश भाजपा ने ‘वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक 2024’ का स्वागत करते हुए इसे मुस्लिम समाज के गरीबों, बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को उनका वाजिब हक दिलाने की दिशा में प्रभावी कदम बताया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सहित इंडी गठबंधन की जो पार्टियां इस बिल का विरोध कर रही हैं, वे मुस्लिम समाज के आम लोगों और महिलाओं की प्रगति नहीं देखना चाहतीं.
उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड को भू-माफियाओं और लुटेरों के चंगुल से मुक्त कराकर गरीब मुसलमानों के हित में इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है. कुछ लोग भू-माफियाओं की कठपुतली बनकर केंद्र के इस सकारात्मक प्रयास का विरोध कर रहे हैं. यह दुखद है, उन्हें गरीब मुसलमानों की चिंता करनी चाहिए.
वक्फ के इतिहास का जिक्र करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह आजादी के पहले से वजूद में है. आजादी से पहले भी इसके नियम-कानूनों में संशोधन हुआ. अब से पहले तक इस एक्ट में पांच बार संशोधन हो चुके हैं. ऐसे में जनहित में लाया गया संशोधन बिल असंवैधानिक कैसे हो गया?
मरांडी ने कहा कि 2013 में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने इसमें गैरकानूनी तरीके से संशोधन कर वक्फ बोर्ड को असीमित अधिकार दे दिया. स्थिति यह हो गई कि वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन पर अपना अधिकार जता सकता है. वक्फ से जुड़ी समस्या केवल मुसलमानों की नहीं है, बल्कि इससे बड़े पैमाने पर हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई और यहां तक कि मुस्लिम भी पीड़ित हैं. कई ऐसे मामले आए हैं, जिसमें वक्फ ने मनमाने तरीके से मंदिरों, गुरुद्वारों और यहां तक कि पूरे गांव को ही वक्फ की प्रॉपर्टी बता दिया है. कोलकाता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ को एक धार्मिक बोर्ड नहीं माना है, बल्कि इसे वक्फ अधिनियम के तहत स्थापित एक ट्रस्ट या संस्था के रूप में देखा है, जो संपत्ति के प्रबंधन और रखरखाव से संबंधित है.
मरांडी ने कहा कि अब वक्फ संशोधन बिल से वक्फ के तहत पहले से रजिस्टर्ड भू-संपत्तियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. जिन मुद्दों पर विवाद चल रहा है, उनका निपटारा कोर्ट के आदेश पर होगा. बिल का उद्देश्य राज्य वक्फ बोर्डों की शक्तियों, वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण, सर्वेक्षण और अतिक्रमण हटाने से संबंधित मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित करना है. इसीलिए, कई मुस्लिम संगठनों, ईसाई संगठनों ने भी वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन किया है. यह विधेयक रिफॉर्म के लिए है, रिवोल्ट के लिए नहीं. हम इस बिल के माध्यम से पारदर्शिता ला रहे हैं.
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एसएनसी/एबीएम