
रांची, 6 अप्रैल . Jharkhand में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने असम में चल रहे चुनावों और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा Chief Minister हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास कथित तौर पर मुस्लिम बहुल देशों के दो पासपोर्ट होने के आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी बिना सिर पैर की बातें करती है.
असम सीएम और उनकी पत्नी पर लगाए गए कांग्रेस के आरोपों पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कांग्रेस को पता है कि असम में चुनाव हार रही है. जब कोई चुनाव हारता है तो वह कुछ भी बयानबाजी करता है और माहौल बिगाड़ने की कोशिश करता है.
Jharkhand सीएम द्वारा असम में चुनाव प्रचार करने पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्हें Jharkhand में तो कुछ काम करना है नहीं. वो तो पर्यटक की तरह घूमते रहते हैं. जब पूरा देश गणतंत्र दिवस मना रहा था, तब Jharkhand के Chief Minister लंदन घूम रहे थे. असम में पूरा मंत्रिमंडल वहां डेरा डालकर बैठ गया है.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वह लगभग 18 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं. इतनी सीटों से वे Government तो नहीं बना पाएंगे. मुझे लगता है कि वह चुनाव लड़ने के लिए नहीं, कहीं चाय बागान खरीदने तो नहीं गए हैं. हो सकता है कि वह वहां निवेश करने गए हों.
Jharkhand में उन्हें बहुमत की Government मिली हुई, इसके बाद आदिवासियों ये हालत है कि बीमार होने पर एम्बुलेंस नहीं मिलता है. गोड्डा में एक महिला टेम्पों में बच्चे को जन्म दे दिया. चाईबासा, संथाल परगना समेत तमाम इलाकों की स्थिति कैसी है? जहां से खुद Chief Minister विधायक हैं, वहां जाने का रास्ता नहीं है. उन्हें यहां सड़क बनानी चाहिए तो वह असम में जाकर भाषण दे रहे हैं.
वहीं social media पर एक पोस्ट के जरिए हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया कि असम की वीर और क्रांतिकारी धरती पर लोकतंत्र की आवाज को दबाने की कोशिशें की गईं. कल कल्पना को सभा करने से रोका गया, आज मुझे असम के रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा के अपने भाई-बहनों से मिलने नहीं दिया गया. क्या सच में विरोधियों को लगता है कि संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर ऐसे षड्यंत्र से वे तीर-धनुष की ताकत को रोक पाएंगे?
उन्होंने आगे कहा कि इतने वर्षों तक तो चाय बागान के मेरे लाखों शोषित, वंचित आदिवासी समाज के भाइयों-बहनों को रोकने की नाकाम कोशिश की है, और कितना रोक पाओगे? इतिहास गवाह है, जब-जब आवाज दबाई गई है, वह और बुलंद होकर उभरी है. आगामी 9 अप्रैल के दिन तीर-धनुष पर बटन दबाकर मेरे ये लाखों भाई-बहन अपने संघर्ष का हिसाब लेकर रहेंगे.
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एएमटी/डीएससी