कोलकाता, 25 मार्च . ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस शासित पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले चुनावों से पहले मतदाता सूची में हेरफेर का मुद्दा गरमाया हुआ है. तृणमूल जहां भाजपा पर दूसरे राज्यों के वोटरों के नाम जुड़वाने के आरोप लगा रही है, वहीं राज्य के मुख्य विपक्षी दल ने ममता सरकार पर वोटर लिस्ट से हिंदुओं के नाम हटाने का आरोप लगाया है.
पश्चिम बंगाल भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व लोकसभा सांसद अर्जुन सिंह ने मंगलवार को समाचार एजेंसी से कहा, “पश्चिम बंगाल में तृणमूल सरकार, आगामी 2026 विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए वोटर लिस्ट के साथ गड़बड़ कर रही है. राज्य सरकार वोटर लिस्ट में अवैध रोहिंग्याओं, बांग्लादेशियों और जिहादियों के नाम शामिल कर रही है. एक-एक मुसलमान वोटर्स के तीन-चार विधानसभा में नाम हैं. अगर प्रदेश में कई फेज में चुनाव होंगे, तो वे एक समय पर एक विधानसभा में और फिर दूसरे विधानसभा में वोट देने की तैयारी में हैं. अगर इसे नहीं रोका गया, तो वे फिर से बंगाल के चुनाव में धांधली करेंगे.”
प्रदेश सरकार पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए अर्जुन सिंह ने कहा, “पश्चिम बंगाल में धांधली करके चुनाव जीतने की परंपरा है. इसमें चुनाव आयोग की बड़ी भूमिका है. आयोग को बायोमीट्रिक सिस्टम करना चाहिए. अगर बंगाल जैसे राज्यों के लिए इलेक्शन रिफॉर्म बिल नहीं लाया जाता है और चुनाव के वक्त सारी व्यवस्था को सुदृढ़ नहीं किया जाएगा, तो पश्चिम बंगाल में कभी भी चुनाव सही से नहीं कराया जा सकेगा. यहां पर हमेशा रक्तरंजित चुनाव होगा. मुझे लगता है कि चुनाव आयोग ने इस मुद्दे को पहले ही संज्ञान में लिया है, जिस पर जल्द ही कोई कार्रवाई होगी.”
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन पर भाजपा विधायक ने कहा, “आंदोलन किया जा सकता है, भारत वर्ष में यह सभी का अधिकार है. उन्हें क्या लगता है कि देश में करीब पौने दो लाख एकड़ की जमीन वक्फ बोर्ड की संपत्ति है. इसका उनके पास दस्तावेज है? एक मुस्लिम स्कॉलर का बयान सुन रहा था, जिसमें वह बता रहे थे कि वक्फ के पास करीब 80 प्रतिशत जमीनों का दस्तावेज नहीं है. वहीं, जो 20 प्रतिशत जमीन है, उसमें से 10 फीसदी कब्रिस्तान है.”
उन्होंने कहा, “बहुत सारी जगहों पर हिंदुओं के मंदिरों की जमीनों पर दखल देकर कब्रिस्तान बनाया है. ऐसे में वक्फ एक लैंड जिहाद है. अब लोकसभा और राज्यसभा में इस पर कानून आ रहा है. हम इसे समाप्त कर देंगे.”
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एससीएच/एकेजे