भोपाल, 2 मार्च . बालाघाट वन क्षेत्र में झाड़ियों के बीच छिपा एक और बाघ का शव बरामद किया गया है. यह महज एक महीने में बाघ की चौथी मौत है, जो मध्य प्रदेश में बाघों की सुरक्षा और संरक्षण पर सवाल खड़ा करती है. मध्य प्रदेश भारत में ‘टाइगर स्टेट’ के नाम से जाना जाता है.
मध्य प्रदेश के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एल कृष्णमूर्ति ने बाघ की मिलने की पुष्टि की और को बताया, “शनिवार को कटंगी रेंज के मुंडीवाड़ा सर्कल के कोदमी बीट में बाघ का शव मिला.”
हालांकि, शुरुआती जांच में अवैध शिकार की बात को खारिज किया गया है, लेकिन मामला अभी सुलझने से बहुत दूर है. उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है.
वन्यजीव अधिकारियों और पशु चिकित्सकों के प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार, बाघ की मौत का संभावित कारण भूख और निर्जलीकरण है.
अधिकारी ने कहा, “यह एक नर बाघ था. शव के गले में एक तार का फंदा मिला है, जिससे लगता है कि वह संघर्ष कर रहा था. वह कुछ भी खाने में असमर्थ हो गया था और दर्दनाक मौत हो गई.”
सूत्रों के अनुसार, बाघ उस जाल में फंस गया था, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर शिकारी जंगली सूअरों और अन्य जानवरों को फंसाने के लिए करते हैं. बाघ ने शायद खुद को छुड़ाने के लिए जीवन के लिए संघर्ष किया होगा. विशेषज्ञों का अनुमान है कि बाघ करीब 15 दिनों तक जाल में फंसा रहा होगा.
अपुष्ट रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि बाघ की मौत से एक दिन पहले, बीट स्टाफ ने बाघ को उसी क्षेत्र में देखा था, लेकिन उसकी गंभीर स्थिति पर किसी का ध्यान नहीं गया.
शनिवार की सुबह जब वन विभाग के कर्मचारी बाघ को खोजने निकले तो उन्हें झाड़ियों के बीच उसका शव मिला. सूचना मिलने पर रेंज अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे. वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया और पशु चिकित्सकों ने शव का पोस्टमार्टम किया.
बाघ की गर्दन के चारों ओर पाया जाने वाला खतरनाक तार का फंदा आमतौर पर शिकारियों द्वारा जंगल की सीमा पर जंगली सूअरों को पकड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. वन विभाग का वर्तमान अनुमान है कि यह जाल सूअर के लिए था, और बाघ अनजाने में शिकार बन गया. फिर भी, अवैध शिकार की संभावना को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता.
बता दें कि उमरिया जिले के वन प्रभाग के पाली रेंज के करकटी क्षेत्र में दो सप्ताह पहले ही एक और बाघ का शव मिला था. हालांकि, वन अधिकारियों ने शिकार की संभावना से इनकार किया था.
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