भारत ‘महिला विकास’ से आगे बढ़कर ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ की दिशा में अग्रसर है: अन्नपूर्णा देवी

New Delhi, 11 अप्रैल . केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने Saturday को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को ऐतिहासिक कदम बताया है. उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में देश ने महिलाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन देखा है. आज नारी केवल विकास की सहभागी नहीं, बल्कि विकास की अगुवाई कर रही है.

Union Minister ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने का ऐतिहासिक कदम हो, या स्वच्छ India मिशन के तहत करोड़ों शौचालय बनाकर महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा प्रदान करना, उज्ज्वला योजना से धुएं से मुक्ति दिलाकर स्वास्थ्य की रक्षा हो, या मुद्रा योजना के माध्यम से करोड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, हर पहल में नारी शक्ति को सशक्त करने का स्पष्ट संकल्प दिखाई देता है.

उन्होंने कहा कि आज India महिला विकास से आगे बढ़कर महिला नेतृत्व वाले विकास की दिशा में तेजी से अग्रसर है. आइए, हम सभी मिलकर नारी शक्ति के इस सशक्त अभियान को और आगे बढ़ाएं और एक सशक्त, समृद्ध India के निर्माण में योगदान दें.

इससे पहले उत्तर प्रदेश Government में महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को देश के लोकतांत्रिक इतिहास का ऐतिहासिक और युगांतरकारी कदम बताया. उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति निर्माण में सशक्त भागीदार और निर्णयकर्ता बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा.

भाजपा के राज्य मुख्यालय में Saturday को आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बेबी रानी मौर्य ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र Government द्वारा लाया गया यह संवैधानिक संशोधन देश की करोड़ों महिलाओं के सम्मान, अधिकार और भागीदारी का राष्ट्रीय संकल्प है. संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाला यह कानून लोकतंत्र को अधिक समावेशी, संवेदनशील और प्रभावी बनाएगा.

उन्होंने कहा कि India में महिलाओं की भागीदारी मतदान और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही है, लेकिन Political प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षाकृत कम है. भागीदारी बढ़ी है, लेकिन प्रतिनिधित्व संतुलित नहीं है, इसी अंतर को समाप्त करने के लिए यह कानून आवश्यक है.

एमएस/डीकेपी

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