Wednesday , 22 January 2020
कासिम सुलेमानी को मारने को अमेरिका मान रहा अपनी बड़ी कामयाबी

कासिम सुलेमानी को मारने को अमेरिका मान रहा अपनी बड़ी कामयाबी

मानता था लादेन और बगदादी से भी ज्यादा खतरनाक

वॉशिंगटन . ईरान के दूसरे सबसे ताकतवर शख्स मेजर जनरल कासिम सुलेमानी को ड्रोन हमले में मारने को अमेरिका अपनी बड़ी सफलता के रूप में देख रहा है. पश्चिम और मध्य पूर्व एशिया में अपने प्रभुत्व के लिहाज से अमेरिका इसे बेहद अहम मान रहा है. यहां तक कि उसका मानना है कि खूंखार आतंकी ओसामा बिन लादेन को ढेर करने से भी यह बड़ी कामयाबी है.

मीडिया के मुताबिक कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि ईरान के साथ अमेरिका अब न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा. इराक इनिशिएटिव ऐट अटलांटिक काउंसिल के डायरेक्टर अब्बास काधिम के हवाले से खबर है कि, ‘किसी ऐसे शख्स को मार गिराना जिसे पूरी दुनिया में ही आतंकवादी माना जाता हो, एक आसान चीज है. लेकिन ऐसे किसी व्यक्ति को मारना जिसे वह देश आतंकी न मानता हो, जहां वह मौजूद हो तो यह आसान नहीं है.’

अलकायदा का आतंकी सरगना ओसामा बिन लादेन और इस्लामिक स्टेट का चीफ अबू बकर अल-बगदादी हमेशा छिपकर रहते थे और ठिकाने बदलते रहते थे. हालांकि सुलेमानी के साथ ऐसा नहीं था. वह ईरान की सेना के मेजर जनरल थे, जो विदेशी अभियानों में शामिल रहते थे और खुले तौर पर यात्रा करते थे. अमेरिकी थिंकटैंक से ही जुड़े एक और रणनीतिक जानकार ने कहा कि किसी देश की सेना से जुड़े शख्स को मार गिराना अलकायदा और आईएस के खिलाफ अभियान से अलग चीज है. फिलहाल अमेरिका और उसके सहयोगी देश सऊदी अरब और यूएई इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आखिर ईरान कैसे प्रतिक्रिया देगा. सऊदी अरब और यूएई को इराक में उसकी ओर से टारगेट किया जा सकता है. ऐसे में दोनों ही देशों की नजर अमेरिका पर है कि वह कैसे ईरान के खिलाफ आगे बढ़ता है.