दूध’ की बिरादरी से बाहर हुए आमंड और सोया मिल्क – Daily Kiran
Saturday , 23 October 2021

दूध’ की बिरादरी से बाहर हुए आमंड और सोया मिल्क

नई दिल्ली (New Delhi) . प्लांट बेस्ड पेय पदार्थों पर यह फैसला अचानक नहीं आया है. लंबे समय से भारतीय डेयरी उद्योग इसके लिए खाद्य नियामक पर दबाव डाल रहा था. वैसे “असली दूध” को लेकर ऐसी ही कुछ लड़ाइयां यूरोप और अमेरिका में भी चली हैं.भारतीय फूड रेगुलेटर- फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने प्लांट बेस्ड पेय पदार्थों (आमंड मिल्क, सोया मिल्क, वॉलनट मिल्क आदि) की कंपनियों को अपनी प्रचार सामग्री और लेबल से ‘दूध’ या ‘मिल्क’ शब्द हटाने को कहा है. ई-कॉमर्स कंपनियों से भी इन प्रोडक्ट्स को उनके दूध और डेयरी सेक्शन से हटाने के लिए कहा गया है. इसका यह मतलब हुआ कि अब एमेजॉन इंडिया, फ्लिपकार्ट, बिगबास्केट और ग्रोफर्स जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर डेयरी कैटेगरी में बादाम और सोया दूध जैसे पेय पदार्थ नहीं मिलेंगे. यह फैसला अचानक नहीं आया है, लंबे समय से भारत का डेयरी उद्योग इसके लिए खाद्य नियामक पर दबाव डाल रहा था. वैसे भी यह बहस सिर्फ भारत की न होकर दुनिया के कई देशों की है. यूरोप और अमेरिका में भी ऐसी लड़ाइयां चली हैं.

इनमें एक ओर ‘वीगन मिल्क’ रहे हैं और दूसरी ओर बड़ी डेयरियां. लड़ाई का केंद्र एक ही होता है- ‘असल दूध क्या है?’ और भारत में फिलहाल यह लड़ाई डेयरी उद्योग ने जीत ली है. असल दूध क्या है हैंडबुक ऑफ फूड केमिस्ट्री के मुताबिक दूध में वसा, प्रोटीन, एंजाइम्स, विटामिन्स और शुगर होते हैं और यह स्तनधारी जीवों में उनके बच्चों के पोषण के लिए पैदा होता है. दूध’ स्वस्थ स्तनधारी जानवरों (दुधारू मवेशियों) को पूर्ण रूप से दुहने से निकलने वाला एक साधारण स्राव है. अलग-अलग जगहों पर भले ही दूध को अलग तरह से परिभाषित किया गया हो लेकिन एक बात पर सभी सहमत हैं कि दूध का स्तनधारी प्राणियों से सीधा जुड़ाव है. लेकिन पिछले एक दशक में कई सारे ऐसे उत्पाद ‘दूध’ या ‘मिल्क’ शब्द का उपयोग करते हुए बाजार में आ गए हैं, जिनका स्तनधारी जीवों से कोई लेना-देना नहीं है. ऐसे उत्पाद हैं- आमंड मिल्क, सोया मिल्क, वॉलनट मिल्क और ओट मिल्क आदि. मेवों और अनाजों की प्रॉसेसिंग के जरिए बनाए गए ये एक तरह के तरल पदार्थ होते हैं, जो दूध जैसे लगते हैं. इस कड़ी में अब आलू जैसे प्रतिद्वंदी भी जुड़ गए हैं. ये सभी पौधों पर आधारित पेय हैं लेकिन लोग इन्हें गाय-भैंस के आम दूध के संभावित विकल्पों के तौर पर अपना रहे हैं. जाहिर सी बात है भारत का डेयरी उद्योग इससे खुश नहीं है.

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