Wednesday , 14 April 2021

भाजपा की सरकार जाएगी तभी बचेगा लोकतंत्र : अखिलेश

लखनऊ (Lucknow) . समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्‍यक्ष और पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने का दावा करते हुए कहा कि किसान, दंभी भाजपा सरकार को सड़क पर ले आएंगे और यह सरकार जाएगी तभी लोकतंत्र बचेगा.

सपा मुख्‍यालय में पूर्व मुख्‍यमंत्री ने गोंडा से बसपा के लोकसभा (Lok Sabha) प्रत्‍याशी रहे मसूद आलम, पूर्व विधायक रमेश गौतम और मशहूर शायर मुनव्‍वर राणा की बेटी सुमैया राणा समेत कई प्रमुख नेताओं को सपा में शामिल कराने के बाद पत्रकारों से कहा कि भाजपा की सरकार ने अन्याय और अत्याचार की सीमा पार कर दी है. कोई भी आवाज़ उठाता है, तो उसकी आवाज़ दबाने का काम सरकार कर रही है. यह सरकार जाएगी तभी लोकतंत्र बचेगा.

अखिलेश ने केंद्र सरकार (Central Government)द्वारा पारित तीन नए कृषि कानूनों को किसानों के लिए डेथ वारंट करार दिया. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के तीनों कृषि कानून किसानों के लिए डेथ वारंट हैं. इस सरकार की नीतियों के खिलाफ चल रहे देशव्यापी किसान आंदोलन में सपा भी संघर्षरत है. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने कहा कि सपा नेता और कार्यकर्ता किसान घेरा कार्यक्रम के तहत चौपाल लगाकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं, तो उन पर गम्भीर धाराओं में फर्जी मुकदमे दर्ज कर दिए गए हैं. इससे पहले, मंगवार को ही यादव ने ट्वीट किया भाजपा सरकार ने किसानों द्वारा बातचीत के लिए प्रस्‍तावित दिन की जगह बातचीत की तारीख को आगे बढ़ाकर ये साबित कर दिया कि कड़कड़ाती ठंड में अपना जीवन न्‍यौछावर कर रहे, किसान उनकी प्राथमिकता में नहीं हैं.

भाजपा लगातार किसानों का तिरस्‍कार कर रही है. किसान दंभी भाजपा को सड़क पर ले आएंगे. अखिलेश ने पत्रकारों से कहा किसानों को सरकार छल रही है. इतना झूठ और भ्रष्टाचार किसी सरकार में नहीं रहा है और यह सरकार किसी के साथ कुछ भी कर सकती है. उन्होंने दोहराया कि सपा सभी को साथ लेकर चलेगी और छोटे दलों के लिए दरवाजा खुला रखेगी. अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के फ़ैसलों से देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई है और नोटबंदी तथा लॉकडाउन (Lockdown) इसके उदाहरण हैं. लॉकडाउन (Lockdown) में पैदल अपने घर जाते समय 90 से अधिक मज़दूरों की मौत हो गई, लेकिन सरकार ने किसी की मदद नहीं की.

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