Wednesday , 25 November 2020

विशेष पूजा-अर्चना के बाद बद्रीनाथ धाम के कपाट शीत काल के लिए हुये बंद


चमोली . देवभूमि के चारों धामों में प्रमुख भगवान बद्री विशाल के कपाट आज दोपहर में पूजा-अर्जना के बाद शीतकाल के लिये बंद हो गये हैं. कपाट बंद होने की प्रक्रिया के आखिरी दिन आज प्रात: भगवान नारायण की विशेष पूजा अर्चना की गई, जिसके बाद मुख्य पुजारी रावल जी और देवस्थानम बोर्ड और सैकडों श्रद्दालुओं की मौजूदगी में भगवान बद्री विशाल जी के कपाट इस वर्ष शीतकाल के लिये बंद किये गये. नर नारायण पर्वत के मध्य भैरवी चक्र पर स्थित भगवान बद्री नारायण के मंदिर के कपाट आज वैदिक परम्परा और पूजा अर्चना के साथ शीतकाल के लिये बंद कर दिये गये हैं.

आज सुबह से ही विशेष पूजा और पुष्प श्रृंगार के साथ भगवान का अभिषेक किया गया. वहीं दोपहर में भोग लगने के बाद रावल जी द्वारा स्त्री रूप धारण कर मां लक्ष्मी जी को नारायण के अंक में स्थापित किया गया, जिसके बाद दोपहर ठीक तीन बजकर पैंतीस मिनट पर भगवान बद्री विशाल जी के कपाट इस वर्ष शीतकाल के लिये बंद कर दिये गये. कपाट बंद होने के मौके पर जहां देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु भगवान बद्री विशाल के दर्शन के लिये पंहुचे थे वहीं भगवान बद्री विशाल के दर्शन पाकर वे अपने को धन्य मान रहे है. आज श्रद्दालुओं में भगवान नारायण के दर्शन का उत्साह देखते ही बन रहा था.

गंगोत्री मंदिर धाम समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि गंगा के कपाट दोपहर 12:15 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं. मां गंगा की डोली भोगमूर्ति के साथ अपने शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव के साथ रवाना हुई. मां गंगा के गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने पर श्रद्धालुओं की भीड़ में कमी देखने को मिली. वहीं, मां गंगा की डोली पैदल जांगला मार्ग से शाम को मुखबा गांव से 3 किमी पहले मार्कण्डेय मंदिर में रात्रि विश्राम करेगी. जहां पर स्थानीय लोग और यात्री रात भर मां गंगा के साथ अन्य देवी-देवताओं का भजन कीर्तन करते हैं.