Friday , 7 May 2021

बलूचिस्‍तान लिबरेशन आर्मी का स्वीकारनामा, पाकिस्‍तानी सैनिकों के कपड़े उतार कर उनके हथियार छीने


इस्‍लामाबाद . पाकिस्‍तान के बलूचिस्तान प्रांत के हरनाई में स्थित फ्रंटियर कोर के पोस्ट पर हुए भीषण हमले की जिम्‍मेदारी विद्रोही गुट बलूचिस्‍तान लिबरेशन आर्मी ने ली है. बीएलए ने चेतावनी दी कि कोहलू-कहान रोड को अगर बनाया गया,तब इसका अंजाम बहुत बुरा होगा. बलूच संगठन ने कहा कि रोड को बलूचों के राष्‍ट्रीय हित के खिलाफ पाकिस्‍तान के पंजाबी बना रहे हैं और उन्‍हें पाकिस्‍तानी सेना संरक्षण दे रही है. शनिवार (Saturday) को बीएलए के इस हमले में 7 पाकिस्‍तानी सैनिक मारे गए थे.

बीएलए की ओर से जारी तस्‍वीरों में नजर आ रहा है कि हमले के दौरान पाकिस्‍तानी सैनिकों के कपड़े उतार कर उनके हथियार तक को छीन लिया गया था. बीएलए ने कहा कि पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर कोहलू-कहान रोड को बनाया गया,तब इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी. इसलिए सेना की मदद से इस सड़क को बना रही पाकिस्‍तानी कंपनियों को निर्माण कार्य बंद कर देना चाहिए. बीएलए ने कहा कि बलूचों के राष्‍ट्रीय संपदा को लूटने का इरादा रखने वाली पाकिस्‍तानी ताकतों के खिलाफ बलूचिस्‍तान की आजादी तक संघर्ष जारी रहेगा. उसने चेतावनी दी कि पाकिस्‍तानी सेना के खिलाफ इस तरह के हमले आगे भी जारी रहने वाले है. उन्‍होंने स्‍थानीय लोगों और पाकिस्‍तानी कंपनियों से अपील की कि वे बलूचिस्‍तान पर कब्‍जा करने में पाकिस्‍तानी सेना की मदद नहीं करें.

इसके पहले शनिवार (Saturday) देर रात बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तानी सेना के पोस्ट पर हमला कर सात जवानों की हत्या (Murder) कर दी. इसके बाद स्थानीय लोगों से बदला लेने पर आमादा पाकिस्तानी सेना ने पूरे क्षेत्र में व्यापक अभियान छेड़ दिया. पाकिस्तानी सेना इस अभियानों के जरिए यहां के आम लोगों के घरों में घुसकर उनसे न केवल अभद्रता करती है जबकि विरोध करने पर लोगों को आतंकी बताकर गोली मार देती है. इस हमले के बाद अपनी नाकामियों को छिपाने में जुटे इमरान खान ने पाकिस्‍तानी सेना पर हमले के पीछे सीधे-सीधे भारत का हाथ बताया था.

उन्होंने ट्वीट कर कहा ‘देर रात फ्रंटियर कॉप्स के पोस्ट पर आतंकवादी हमले में 7 जवानों की शहादत को सुनकर दुख हुआ. मेरी हार्दिक संवेदना और प्रार्थनाएँ उनके परिवारों के लिए हैं. हमारा राष्ट्र हमारे साहसी सैनिकों के साथ खड़ा है जो भारतीय समर्थित आतंकवादियों के हमलों का सामना करते हैं.’ कुछ महीने पहले ही बलूच विद्रोहियों ने पंजगुर जिले में सेना के एक काफिले को निशाना बनाया था. जिसमें तीन सैनिक मारे गए थे, जबकि सेना के एक कर्नल सहित 8 अन्य जख्मी हो गए थे. मीडिया (Media) की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में सेना के काफिले पर मई के बाद यह तीसरा हमला था. ये विद्रोही अब अपने हमलों का विस्तार कराची सहित पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में भी कर रहे हैं.

बलूचिस्तान के लोगों ने हमेशा से चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर का विरोध किया है. कई बार बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के हथियारबंद विद्रोहियों के ऊपर पाकिस्तान में काम कर रहे चीनी नागरिकों को निशाना बनाए जाने का आरोप भी लगे हैं. 2018 में इस संगठन पर कराची में चीन के वाणिज्यिक दूतावास पर हमले के आरोप भी लगे थे. आरोप हैं कि पाकिस्तान ने बलूच नेताओं से बिना राय मशविरा किए बगैर सीपीईसी से जुड़ा फैसला ले लिया. 60 बिलियन अमेरिकी डॉलर (Dollar) के लागत वाले परियोजना की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान ने एक स्पेशल फोर्स का गठन किया है, जिसमें 13700 स्पेशल कमांडो शामिल हैं.

इसके बावजूद इस परियोजना में काम कर रहे चीनी नागरिकों पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. जून में कराची के स्टॉक एक्सचेंज पर हुए हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी की माजिद ब्रिग्रेड ने ली थी. पाकिस्तान में बलूचिस्तान की रणनीतिक स्थिति है. पाक से सबसे बड़े प्रांत में शुमार बलूचिस्तान की सीमाएं अफगानिस्तान और ईरान से मिलती है. वहीं कराची भी इन लोगों की जद में है. चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा इस प्रांत से होकर गुजरता है. ग्वादर बंदरगाह पर भी बलूचों का भी नियंत्रण था जिसे पाकिस्तान ने अब चीन को सौंप दिया है.

 

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