Saturday , 6 June 2020
लॉक डाउन पर भारी पड़ रही पेट की भूख समाज का एक तबका न इधर का न उधर का

लॉक डाउन पर भारी पड़ रही पेट की भूख समाज का एक तबका न इधर का न उधर का


जबलपुर (Jabalpur) . यह बात लिखने में कुछ संकोच भी हो रहा है और कुछ और अटपटा भी लग रहा है कल रात शहर के दोनों आला अधिकारी संभागायुक्त रविंद्र मिश्रा एवं आईजी भगत सिंह चौहान शहर के भ्रमण पर निकले और उन्होंने देखा कि लोग घरों के सामने चौपाल लगाकर बैठे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे और गप्पे मार रहे लिहाजा अधिकारी द्वारा तत्काल निर्देश जारी किए की सोमवार (Monday) से लॉक डाउन कर्फ्यू का कड़ाई से पालन कराया जाए सड़कों पर घूमने वालों पर कार्रवाई की जाए अधिकारियों ने देखा कि कोई मॉर्निंग वॉक पर जा रहा था तो कोई इवनिंग वाक कर रहा था जब कोई घर के सामने चौपाल लगाकर अपनी परेशानियां सुना रहा था था अरे साहब इस शहर में 70 फ़ीसदी आबादी ऐसी है जिनके ज्यादा से ज्यादा एक दो कमरों के मकान उनमें आम जनों में कैसे गुजारा करते हैं यह कोई उनसे ही पूछे फिर तो आपने अभी यह नजारा गोरखपुर रामपुर कटंगा क्रासिंग और ग्वारीघाट रोड पर देखा जहां बंगले भी हैं और झोपड़पट्टी भी है शहर की घनी आबादी वाले क्षेत्रों में तो निकलो साहब जहां लोगों के घरों में वेंटिलेशन तक नहीं एसी में सोने वालों की संख्या 10 फ़ीसदी है गर्मी में अधिकांश लोग अपने घरों की छतों में सोते हैं या बाहर आंगन में बिस्तर लगा लेते जिनका आंगन नहीं है वे सड़क के किनारे खटिया लगा कर सो जाते हैं ऐसे में आप उन्हें कह रहे हैं कि घर से बाहर चौपाल ना लगाएं अंदर रहे कोरोनावायरस संक्रमण रोकथाम के लिए लागू प्रोटोकॉल का पालन करना सबके लिए जायज है आपकी चिंता भी जायज है लेकिन सामाजिक पारिवारिक स्तर की मजबूरी देखा जाना भी जायज है देखा जाना चाहिए आज हालात यह है की लॉक डाउन में जबलपुर (Jabalpur)जिले में पूरे 1 हफ्ते हो गए और 6 दिनों से यह शहर कर्फ्यू झेल रहा है किसी का बेटा बाहर गया है तो किसी की बहू बाहर गई है किसी के घर के बुजुर्ग बाहर गए हुए जो जहां है वहां फंस गए ऐसे में उनके मन में बेचैनी बहुत ज्यादा है प्रशासन ने तो कर्फ्यू पास जारी करने के लिए भी संस्था को ही अधिकृत कर दिया लॉक डाउन में जिन संस्थाओं को या कर्मचारियों को छूट है उनके संस्थान ही कर्फ्यू पास जारी करें इन पासों को आपके पुलिस (Police)कर्मी नहीं मान रहे आपने अपनी नैतिक जिम्मेदारी से बचते हुए रास्ता निकाल लिया आम आदमी अपने खाने-पीने के जुगाड़ और बेचैनी दूर करने का क्या प्रयास करें जाहिर घर के अंदर घुसे घुसे घबराने पर माताएं अपने बच्चों को लेकर और युवा और बुजुर्गों कुछ देर खुली हवा में बाहर करके बैठ जाते कानून व्यवस्था को खतरा है प्रशासन के नियम कानूनों का पालन कर रही इसके बावजूद अब जरूरत से ज्यादा सख्ती विस्फोटक इससे निर्मित कर सकती है जैसे दिल्ली और अन्य राज्यों में मजदूर पलायन कर रहे हैं चुके हैं रो रहे पेट रहे पर अपने घर की ओर जा रहे सबको अपना परिवार प्यारा होता कोई नहीं चाहता कि बीमार हूं एहतियात बरतने सभी काफी लोग दहशत में भी है तरह तरह के भ्रामक प्रचार भी हो रहे हैं कि अभी 2 महीने लॉक डाउन चलेगा अभी 3 महीने लॉक डाउन चलेगा जिनके पास पैसा है उन्हें फिक्र नहीं जिनके घरों में साल भर का अनाज स्टॉक में है आम साधारण आदमी है उसे तो अपने पूरे परिवार की फिक्र है वजह यह है कि समाज का एक तबका जिसे कहा जाता है ग्लैमरस लेकिन वास्तव में उसकी हालत खस्ता है आज आप पत्रकार की बात करें या किसी डॉक्टर (doctor) की बात करें या किसी वकील की बात करें समाज में उनका सम्मान तो है बुद्धिजीवियों में इनकी गिनती होती है पर 70 फ़ीसदी इस श्रेणी के लोगों की हकीकत यह है कि और रोज खाने कमाने जैसी स्थिति है एक साधारण पत्रकार अधिक से अधिक 15000 महीने की पगार में काम करता है कुछ डॉक्टर (doctor) ऐसे हैं जिनकी डिस्पेंसरी में आज भी 20 से 30फीस ली जाती है या फिर 50 फीस ली जाती है दिन भर में हजार 500 कमाकर जाते हैं फिर भी कहलाते डॉक्टर (doctor) साहब समाज में रुतबा होता है इसलिए मध्यम वर्ग में गिनती नहीं होती लिहाजा ना तो इनकी की मदद करने कोई आगे आता है और ना यह संकोच बस किसी से कुछ मदद मांग पाते हैं मेरा दावा है कि अब अगर कुछ ज्यादा ही सख्ती बरती गई तू इसी बुद्धिजीवी वर्ग से विस्फोटक स्थिति निर्मित हो सकती है लोगों की भावनाएं आक्रोश और सियासत के खेल की सूचनाएं इस बात की ओर संकेत कर रही है दूसरा शिकंजा व्यापारी वर्ग पर कसा जा रहा एक तो थोक व्यापारी बिना बिलों के माल दे रहे रेड भी उनके मन के मुताबिक ज्यादा बात की तो माल ले चाहिए वह लो नहीं तो बाहर हो जाओ सोशल डिस्टेंसिंग में वैसे ही दूर-दूर लाइन में खड़े होने पर जब तक खरीददार का नंबर आता है और जब वह जवाब सुनता है तुम मजबूरी बस माल खरीद कर लाता है यही वजह है कि 42 बिकने वाली शक्कर 850 से 55 किलो बिक रही चाय पत्ती के भी कमोवेश यही हाल है दाल और चावल के रेट में 2 से 5 तक का उछाल है इतना जाए पर कहीं-कहीं तो डबल माल बिकने लगा है लेकिन बड़े व्यापारियों को छोटे-छोटे व्यापारियों पर शिकंजा कसा जा रहा है कुछ लोग आपसी रंजिश भी निकाल रहे मोहल्ले पड़ोस में कभी कोई किसी से कोई बात हो गई आज उसको कालाबाजारी से जोड़कर झूठी शिकायतें की जा रही प्रशासन को इन बातों की ओर ध्यान देना होगा अभी तो 1 हफ्ते में आदमी बेचैन हो गया अभी पूरे 15 दिन लॉक डाउन का सामना करना पड़ेगा 1 दिन बाद रामनवमी का त्यौहार है सभी जुलूस स्थगित कर दिए गए लेकिन आज बाजार में हालात यह है कि अगरबत्ती धूप कपूर जो छोटी-छोटी दुकानें मंदिरों के आसपास लगा करती थी वह बंद है गुरंदी में एक तू का व्यापारी की दुकान सील किए जाने से बाकी व्यापारी आक्रोशित हैं अगरबत्ती फूल माला कुछ नहीं मिल पा रहा चैत्र नवरात्रि कापूजा-पाठ को रोना वायरस संक्रमण के साए में गुजरा जा रहा है जिला प्रशासन का जनप्रतिनिधियों के साथ कोई तालमेल नजर नहीं आ रहा दरअसल यह स्थिति प्रदेश में अचानक सत्ता बदलने से निर्मित हुई है कल तक जिन मंत्रियों के आगे पीछे अफसर घूमते थे आज वे असमंजस में है अभी शिवराज मंत्रिमंडल का गठन नहीं हुआ इसलिए अधिकारियों की प्राथमिक अभी तक निर्धारित नहीं हो पाई संभावनाओं के आधार पर अभी से वरिष्ठ विधायक अजय विश्नोई को ही तवज्जो दी जा रही है कांग्रेस भाजपा के विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में जनसेवा का काम कर रहे हैं लेकिन तालमेल और संयोजन के अभाव मेंअभियान गति नहीं पकड़ पा रहा आज आवश्यकता इस बात की है कि शहर की साफ सफाई व्यवस्था दुरुस्त रहे शहर का हर गली मोहल्ला प्रतिदिन सैनिटाइज हो जिसका जहां दम है वहां काम करा ले जाला बाकी सारी हेल्पलाइन नंबर कंट्रोल नंबर एक दिखावा साबित हुए जिला कलेक्टर भरत यादव और पुलिस (Police) अधीक्षक अमृत सिंह की जोड़ी बेशक इस शहर को वैश्विक महामारी से बचाने के लिए रात दिन मेहनत कर रहे हैं यही वजह है कि स्थिति नियंत्रण में है 21 दिन की तालाबंदी समय लंबा होता है पहले ऐसे कभी हालात बने नहीं कर्फ्यू लगे लेकिन दो-चार दिन 8 दिन के लिए उसमें भी कर्फ्यू छूट का लाभ मिलने पर लोग अपनी जरूरत की सामग्री का इंतजाम कर लेते और की है घूम फिर लेते थे क्योंकि इस वैश्विक महामारी से लोगों को बचाना है इसलिए तालाबंदी का कड़ाई से पालन कराने की चिंता तो बनती है पर यदि लोग अपने घर के सामने बैठे हैं और डिस्टेंसिंग है तो उस पर प्रशासन को आपत्ति नहीं होनी चाहिए दरअसल इसके पीछे कारण यह दिया जा रहा है कि गर्मी का सीजन चालू हो गया है बिजली का आना-जाना भी शुरू हो गया दिन भर घर के अंदर लोग खासकर बच्चे मानसिक रूप से कुंठित हो रहे ऐसे में बुजुर्ग भी बेचैन हो रहे जो घरों की छतों पर नहीं चल सकते मजबूरन बाहर टेबल कुर्सी लगाकर बैठ जाते वह भी कुछ देर के लिए ऐसे लोगों को मास्क लगाने उसने टाइपिंग करने की और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने की समझाइश दी जा सकती है लेकिन उन्हें शक्ति के नाम पर प्रताड़ित नहीं किया जा सकता मैं फिर एक बार दौरा रहा हूं ऐसे में विस्फोटक स्थिति बन सकती है आखिर दिल्ली में क्या हुआ बिहार के मजदूर रुके हुए थे जब उन्हें खाने-पीने नहीं मिला और रोकने का आसरा नहीं मिला गलियों में पूछा तो पर पुलिस (Police) के डंडे मिले जिसका स्वरूप आपके सामने बगावत पर उतर आए मजदूर आज अपने घरों को लौट रहे हो प्रशासन को उनकी वापसी की व्यवस्था मजबूरी में करानी पड़ रही है दरअसल इन दिनों प्रशासन को एक ध्यान देना होगा कि जबलपुर (Jabalpur)नवी करीब 58000 मजदूर उद्योग धंधे बनवाने से बेकार बैठे और अब उनकी भूख तालाबंदी पर भारी पड़ रही जबलपुर (Jabalpur)से भी मजदूरों ने पलायन शुरू कर दिया इस शहर में रीवा सतना शहडोल मंडला जिलों के साथ पश्चिम बंगाल और बिहार के लोग भी बड़ी तादाद में काम करने आते हैं सोने चांदी (Silver) की दुकान बंद है भवन निर्माण कोई काम बंद है ऐसे में यह मजदूर बेकार हो गए हैं और पलायन के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं दरअसल या हजार 500 लोगों के पुनर्वास का मुद्दा नहीं लाखों लोग ऐसे हैं जो यहां तालाबंदी में फंसे हुए है पुलिस (Police) के जवान 12 12 घंटे ड्यूटी दे रहे है पर उन्हें जो आदत लग गई है वह पूरी नहीं हो पा रही इशारा ऊपरी कमाई की ओर है कमाई की जो साधन है वह बंद सरकार (Government) मोटी मोटी पगार देती है फिर भी इन अपराधियों से हफ्ता बंधी और दुकानदारों से मुंह से खोरी चाहिए चाहिए इस समय पुलिस (Police) वालों से दवा वाले और अस्पताल वाले बेहद परेशान हैं सैनिटाइजर (Sanitizer) जो महंगा हो चुका है मास्क जो महंगा हो चुका है उसकी आवक भी कम हो रही है पूरेपुलिस (Police) थाने के लिए मास्क और सैनिटाइजर (Sanitizer) उपलब्ध कराने निजी अस्पताल संचालकों पर दबाव बनाया जा रहा है ऐसा ही नहीं जिन थाना क्षेत्र में सर्वाधिक अस्पताल है उनके टीआई भी परेशान हैं उन पर दूसरों थानों के लिए व्यवस्था करने के लिए प्रेशर आ रहा है सारी चीजें महंगी है आज के दौर में तमाम अस्पतालों की मालिक राजनीतिक रसूख के लिए जाने जाते हैं लिहाजा उनसे पुलिस (Police) के संबंधों में कड़वाहट बढ़ती जा रही वर्तमान समय संबंध बनाने और बिगाड़ने का नहीं बल्कि समन्वय बनाकर काम करने का है इस समय हर किसी का योगदान महत्वपूर्ण है देश के सर्वोच्च व्यक्ति प्रधानमंत्री जब हाथ जोड़कर माफी मांग रहे तब ऐसे में प्रशासन का फर्ज बनता है कि लोगों को समझाइश देकर हाथ जोड़कर किसी तरह संकट की घड़ी निकालनी है आज जनप्रतिनिधियों की भी आवश्यकता है कि वे कम से कम अपने अपने क्षेत्रों में जनता की आम समस्याओं को जानने निकल सकते है पर अभी तक कोई जनप्रतिनिधि मैदान में नहीं आया सब सोशल मीडिया (Media) के माध्यम से और अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से जनसेवा की औपचारिकता पूरी कर रहे हैं एकमात्र जांबाज नेता केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री पहलाद सिंह पटेल ताल ठोक कर मेडिकल कॉलेज गए और उन्होंने कोरोनावायरस का इलाज कर रहे डॉक्टरों (Doctors) की हौसला अफजाई की श्री पटेल बड़े फुहारा क्षेत्र भी गए और लोगों को समझाइश दी और उन्होंने अपने सैनिक सोसायटी सहित कई क्षेत्रों में सेनीटाइज भी कराया विधायकों में अभी तक एकमात्र विधायक पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया ऐसे जनप्रतिनिधि जाए जिन्हें ₹500000 अपनी तरफ से दिए और 2 माह का वेतन और 1000000 रुपए विधायक निधि से दिए इसके अलावा विधायक अजय विश्नोई ने ₹50000 अपनी तरफ सेर और ₹200000 की विधायक निधि कलेक्टर को सौंपी सांसद (Member of parliament) राकेश सिंह ने 1 माह का वेतन और एक करोड़ रुपए की सांसद (Member of parliament) निधि कोरोनावायरस के संक्रमण से निपटने के लिए जबलपुर (Jabalpur)जिले को आवंटित की की है इसी प्रकार कांग्रेस विधायक संजय यादव ने सबसे पहले अपने वेतन की 5 माह की राशि ₹154000 दान करके इसकी शुरुआत की थी इसके बाद ₹51000 जामदार हॉस्पिटल और ₹50000 सिटी हॉस्पिटल की ओर से रेड क्रॉस सोसाइटी को दिए गए लेकिन कुछ धनाढ्य संस्थाएं उद्योगपति अभी सामने नहीं आए है जबलपुर (Jabalpur)में कोरोनावायरस का संक्रमण फैला उसके लिए जितना जिम्मेदार दुबई से लौटा स्वर्ण कारोबारी है उतना ही दोषी हमारे यहां जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का अमला है आसपास के लोग लगातार दो दिन से सूचना दे रहे थे लेकिन स्वास्थ्य विभाग का कमला ना उन्हें समझाइश देने पहुंचा और ना ही अग्रवाल परिवार को आइसोलेशन में रखने की कोई व्यवस्था की गई अखबारों ने इस खबर को प्रमुखता से दो अखबारों ने इस खबर को प्रमुखता से छापा था उसके बाद भी प्रशासन और उसकी सूचना तंत्र ने इस खबर को हवा में उड़ा दिया जिसका नतीजा यह है कि आज जबलपुर (Jabalpur)में कोरोनावायरस के आठ संक्रमित पाए मरीज मेडिकल में इलाज करा रहे है और करीब साढे 300 लोग जो उन संपर्क में आए सभी होम क्वॉरेंटाइन है बस आखरी में मैं यही कहूंगा बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं