Saturday , 19 June 2021

वर्ष 2025 तक टीबी-मुक्त भारत के लिए एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन की योजना बनाई जा रही: मंत्री हर्षवर्धन


नई दिल्ली (New Delhi) . केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने स्टॉप टीबी पार्टनरशिप बोर्ड की अध्यक्षता संभालने के बाद यहां वीडियो-कांफ्रेंस के जरिए पहली बार स्टॉप टीबी पार्टनरशिप बैठक को संबोधित किया. 24 मार्च, 2021 को आयोजित होने वाले विश्व टीबी दिवस समारोह की पृष्ठभूमि में इस बैठक का अतिरिक्त महत्व है.

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अपने भाषण की शुरूआत में स्टॉप टीबी पार्टनरशिप बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर गहरी कृतज्ञता एवं सम्मान की भावना व्यक्त की और कहा कि इससे उन्हें एक अन्य जानलेवा बीमारी को खत्म करने की दिशा में काम करने के लिए एक और वैश्विक मंच मिलेगा. उन्होंने भारत में टीबी को स्वास्थ्य संबंधी एक ऐसी गंभीर चुनौती के रूप में लेने पर जोर दिया, जिसने देश के राजनीतिक नेतृत्व को 2025 तक इसके उन्मूलन का लक्ष्य बनाने के लिए प्रेरित किया है. उन्होंने कहा कि “तपेदिक भारत की स्वास्थ्य संबंधी सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है, जिसकी वजह से रोगियों और समुदायों को बड़े पैमाने पर विनाशकारी स्वास्थ्य, सामाजिक और वित्तीय परिणामों का सामना करना पड़ सकता है.

टीबी रोगियों की एक निश्चित संख्या के लिहाज से, कुल 2.64 मिलियन टीबी रोगियों की अनुमानित संख्या के साथ, भारत वैश्विक स्तर पर टीबी का सबसे बड़ा बोझ ढो रहा है. डॉ. हर्षवर्धन ने देश में टीबी की समस्या से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व में उठाए गए बड़े कदमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि “पिछले कुछ वर्षों में, हमने टीबी के उपचार के उद्देश्य से भारत की नैदानिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है. हमारे राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम ने टीबी के लिए प्रदान की जा रही सेवाओं के मामले में बहुत तेजी से प्रगति की है.

इस राष्ट्रीय कार्यक्रम ने देशभर में टीबी के उपचार की निर्बाध सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए हैं. इस दिशा में शुरूआती कदमों में उपचार कराने वाले रोगियों के लिए दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और नैदानिक सेवाओं को जारी रखने जैसे आवश्यक सेवाओं पर ध्यान केन्द्रित किया गया. नमूनों के संकलन एवं परिवहन और टीबी की दवाओं की होम डिलीवरी में सहायता के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के उपयोग सहित कई नवीन दृष्टिकोण अपनाए गए. जरूरत के आधार पर इस कार्यक्रम में सुधार किया गया और सुझाये गये उपचार के पालन की निगरानी और कोविड -19 एवं टीबी के लिए समुदाय के नेतृत्व में निगरानी संबंधी पहलों के लिए प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को अपनाया गया.

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