रांची, 1 अप्रैल . झारखंड में मंगलवार को ‘धरती और सूरज के विवाह’ उत्सव की धूम है. प्रकृति पूजक आदिवासी समाज इस उत्सव को सरहुल पर्व के रूप में मनाता है. इस मौके पर झारखंड की राजधानी रांची सहित विभिन्न शहरों-गांवों में शोभा यात्राएं निकाली जा रही हैं. हजारों की तादाद में लोग इन शोभा यात्राओं में शामिल हो रहे हैं. सरना धर्म के प्रतीक ध्वजों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों, ढोल-नगाड़े के साथ नाचते-गाते स्त्री-पुरुष और बच्चे सड़कों पर हैं.
रांची के आदिवासी हॉस्टल और सिरम टोली स्थित सरना स्थल (आदिवासियों का पूजा स्थान) में आयोजित सरहुल के मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी शिरकत की. पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने हातमा में सरना स्थल पर पूजा-अर्चना में भाग लिया. रांची के विधायक और पूर्व मंत्री सीपी सिंह, आजसू पार्टी के प्रमुख सुदेश महतो सहित कई प्रमुख लोग भी सरहुल की शोभायात्रा में शामिल हुए.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सरहुल पूजा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा, “प्रकृति महापर्व सरहुल के शुभ अवसर पर सभी को अनेक-अनेक बधाई, शुभकामनाएं और जोहार. राज्य के बेहतर भविष्य के लिए आने वाले 25 वर्ष को ध्यान में रखकर हमें आगे बढ़ना है तथा पूर्वजों से मिली समृद्ध विरासत, परंपरा एवं संस्कृति को संरक्षित और अक्षुण्ण रखने के साथ मजबूती देना है.”
सोरेन ने सोशल मीडिया पर एक अन्य पोस्ट में ऐलान किया कि आदिवासी समुदाय की पुरानी मांग को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष दो दिनों का राजकीय अवकाश रहेगा.
मंगलवार को पूर्व से अवकाश घोषित था. अब बुधवार को भी सभी सरकारी कार्यालय और संस्थान बंद रहेंगे.
सरहुल त्योहार से जुड़ी मान्यताएं बेहद दिलचस्प हैं. जनजातीय परंपराओं के जानकार बताते हैं कि हमारी संस्कृति की मान्यताओं के अनुसार धरती कन्या है, जिसका विवाह सरहुल के रोज सूरज से होता है. शादी के पहले सूरज अपनी प्रिया धरती से प्रणय निवेदन करता है और खूब सारा धूप धरती पर उड़ेलता है. यह सूरज की ओर से धरती के लिए प्यार है. धूप के आने से धरती प्रसन्न हो जाती है और उसका रोम-रोम धन-धान और ऐश्वर्य से लद जाता है.
इस अवसर पर पाहन (गांव का पुजारी) साल के पेड़ से फूल लेकर धरती का श्रृंगार करता है और धरती का हाथ उसके वर अर्थात सूरज को सौंपता है.
सरहुल को लेकर कई कथाएं भी प्रचलित हैं. उरांव समुदाय में केकड़ा और मछली की कथा बहुत प्रचलित है. यह समुदाय मानता है कि धरती और साल के पहले केकड़ा और मछली आए. केकड़ा ने ही समुद्र से माटी निकाल कर धरती का निर्माण किया और मछली ने उसको सहयोग दिया, इसलिए ये दोनों प्राणी हमारे आदि पुरखे हैं.
पाहन या पुजारी सरहुल के दिन सरनास्थल पर रखे गए एक घड़े का पानी देखकर आने वाले महीनों में वर्षा की भविष्यवाणी भी करते हैं. इस वर्ष रांची के हातमा में मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने पूजा-अर्चना के बाद इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की भविष्यवाणी की है.
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एसएनसी/एबीएम