फार्मा पर अमेरिकी रेसिप्रोकल टैरिफ छूट का विशेषज्ञों ने किया स्वागत, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर जोर

नई दिल्ली, 3 अप्रैल . भारतीय दवा निर्यात को डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ से छूट दी गई है. उद्योग जगत के जानकारों ने गुरुवार को इस कदम का स्वागत किया और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया.

विशेषज्ञों ने इस टैरिफ छूट के लिए लागत प्रभावी और जीवन रक्षक भारतीय जेनेरिक दवाओं के महत्व का हवाला दिया.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आयात पर 26 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा के बाद बुधवार को जारी व्हाइट हाउस फैक्टशीट में कहा गया कि फार्मास्युटिकल्स को टैरिफ से छूट दी गई है.

भारतीय दवाएं, विशेष रूप से जेनेरिक, अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की लागत को कम करने में मदद करती हैं, जो पहले से ही दुनिया में सबसे महंगी दवाओं में शामिल हैं.

भारतीय फार्मास्युटिकल अलायंस (आईपीए) के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा, “भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंध मजबूत हैं, जिसमें मिशन-500 पहल के तहत व्यापार को दोगुना कर 500 बिलियन डॉलर तक ले जाने का साझा दृष्टिकोण है. फार्मास्युटिकल्स इस साझेदारी का आधार बने हुए हैं, क्योंकि भारत सस्ती दवाओं की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित कर वैश्विक और अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.”

उन्होंने कहा, “फार्मास्युटिकल्स को टैरिफ से छूट दी गई है. यह निर्णय सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा में लागत प्रभावी, जीवन रक्षक जेनेरिक दवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है.”

इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (आईबीईएफ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका भारत से फार्मास्युटिकल्स का सबसे बड़ा आयातक है, जो वित्त वर्ष 2024 के दौरान 8.73 बिलियन डॉलर मूल्य के उत्पाद लाया. आईबीईएफ ने कहा कि भारत के फार्मास्युटिकल निर्यात का 31.5 प्रतिशत अमेरिका को गया. जैन ने कहा कि भारतीय फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री दोनों देशों की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.

उन्होंने कहा कि देश दवा आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को मजबूत करेगा और सभी के लिए सस्ती दवाओं तक पहुंच सुनिश्चित कर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा.”

एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ मेडिकल डिवाइस के डेटा के अनुसार, 2023-24 में, भारत का अमेरिका को मेडिकल डिवाइस निर्यात 714.38 मिलियन डॉलर था, जबकि अमेरिका से भारत में आयात 1,519.94 मिलियन डॉलर के साथ काफी अधिक था.

एआईएमईडी के फोरम कॉर्डिनेटर राजीव नाथ ने कहा, “अमेरिका को भारतीय मेडिकल डिवाइस निर्यात पर 26 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने से इस क्षेत्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती हो सकती है.”

नाथ ने कहा, “ऐतिहासिक रूप से, अमेरिका के लिए भारत लागत प्रभावी, उच्च गुणवत्ता और कम मूल्य- उच्च मात्रा वाले चिकित्सा उपकरणों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा है. हालांकि, यह नया टैरिफ संभवतः भारतीय चिकित्सा उपकरणों के निर्यात को प्रभावित कर सकता है. हमें उन स्थितियों का पता लगाना होगा, जहां अमेरिका किसी एक देश पर अपनी आपूर्ति श्रृंखला निर्भरता में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है.”

उन्होंने घरेलू विनिर्माण को मजबूत कर और विदेशी बाजारों पर निर्भरता कम कर स्वास्थ्य सेवा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया.

एसकेटी/एबीएम