भोपाल, 7 मार्च . मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार की पहल पर खुशी जताई.
मोहन यादव ने शुक्रवार को कहा, “मुझे खुशी है कि मध्य प्रदेश में वन्यजीवों के लिए एक अलग माहौल बन रहा है. भोपाल पहली राजधानी बन गई है, जो वन्यजीवों की दृष्टि से विशेष स्थान रखती है.”
उन्होंने बताया कि राज्य में आठ रिजर्व पार्कों में सभी व्यवस्थाएं पूर्ण हैं और भविष्य में भी नए पार्क बनाए जाएंगे. वन्यजीव प्रबंधन के मामले में मध्य प्रदेश देश और दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है.
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने भोपाल में आठवें टाइगर रिजर्व पार्क की घोषणा की थी. इसका स्वागत सफलता के साथ हुआ. वन्यजीव प्रबंधन के मामले में भोपाल देश की पहली राजधानी बन गई है. हम एक और टाइगर रिजर्व पार्क के लिए अधिसूचना जारी कर रहे हैं. माधव राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश का नौवां टाइगर रिजर्व बनेगा.”
उन्होंने राज्य सरकार की अन्य वन्यजीव परियोजनाओं के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा, “हमने नए पार्क का नाम माधव टाइगर रिजर्व रखा है. पीएम मोदी द्वारा शुरू किए गए कुनो चीता प्रोजेक्ट के अलावा, चंबल में घड़ियाल संरक्षण परियोजना पर भी काम चल रहा है. टाइगर रिजर्व में बड़ी संख्या में जीवों की प्रजातियां पाई जाती हैं और हम वन्यजीवों के प्रति पूरी तरह से फ्रेंडली हैं.”
सीएम यादव ने कहा, “पीएम मोदी के नेतृत्व में हमने चंबल बेल्ट में एशिया की पहली चीता परियोजना सफलतापूर्वक लॉन्च की. अब हम जंगलों में चीतों की दूसरी पीढ़ी को देख रहे हैं. चंबल बेल्ट पर्यटन के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने के लिए तैयार है. हम जिस टाइगर रिजर्व पार्क की घोषणा कर रहे हैं, उसमें भी बड़ी संख्या में वन्यजीव प्रजातियां हैं.”
उन्होंने राजधानी भोपाल में नए कन्वेंशन सेंटर का भूमि पूजन भी किया. इस सेंटर से राजधानी में जिस तरह की सुविधाओं की कमी थी, वह पूरी होगी और यह प्रदेश की पहचान को और भी मजबूत करेगा.
मुख्यमंत्री ने राज्य में धार्मिक पर्यटन के विकास की दिशा में कदम बढ़ाने की बात की. उन्होंने कहा, “मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन की भी अपार संभावनाएं हैं. भगवान कृष्ण ने यहां शिक्षा ग्रहण की थी, और हम उनके भ्रमण स्थलों को विकसित कर रहे हैं.”
मोहन यादव ने कहा कि धार्मिक स्थलों का विकास न केवल सांस्कृतिक धरोहर के रूप में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राज्य के पर्यटन को भी एक नई दिशा दे सकता है. हम पर्यटन के आधार पर प्रदेश की समृद्धि की दिशा में काम कर रहे हैं. धार्मिक पर्यटन से राज्य में न केवल आस्था का विस्तार होगा, बल्कि रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे. हमारी सरकार धार्मिक स्थलों और उनसे जुड़े इतिहास को संरक्षित करने के लिए विशेष योजनाएं बना रही है, जिससे पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके और राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को संजोया जा सके.
–
एकेएस/एकेजे