नई दिल्ली, 26 फरवरी . भारत में इजरायल के राजदूत रियुवेन अजार ने गाजा की फिलिस्तीनी आबादी को पड़ोसी देशों में स्थानांतरित करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव का समर्थन किया.
ट्रंप ने गाजा पट्टी को खाली करने और इसे अमेरिकी नियंत्रण में लेकर विकसित करने की योजना पेश की थी हालांकि उनके प्लान की व्यापक आलोचना हुई लेकिन इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इसका समर्थन किया.
अजार ने से विशेष बातचीत में कहा, “जब दूसरे संघर्षों को देखते हैं, तो बात स्पष्ट हो जाती है. उदाहरण के लिए, जब रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ, तो पांच मिलियन यूक्रेनियन यूक्रेन छोड़कर चले गए. जब सीरिया में गृह युद्ध हुआ, तो आठ मिलियन सीरियाई सीरिया छोड़कर चले गए. किसी भी संघर्ष क्षेत्र में, लोगों को किसी अन्य जगह शरण लेने, शांत जगह पर जाने की अनुमति दी जाती है जब तक कि जब तक कि युद्ध खत्म न हो जाए, जब तक कि चीजें एक निर्माण के माध्यम से न गुजर जाएं और फिर वे वापस आ जाएं. दुनिया में एकमात्र जगह जहां ऐसा करने की अनुमति नहीं है, वह है गाजा पट्टी.”
इजरायली राजदूत ने कहा कि ट्रंप कुछ ऐसा कह रहे हैं जो ‘बहुत स्वाभाविक’ है क्योंकि गाजा के लोगों को तब तक अस्थायी रूप से सुरक्षित पनाहगाह में स्थानांतरित किया जा सकता है जब तक कि हालात बेहतर नहीं हो जाते. उन्होंने कहा, “यह ऐसा कुछ नहीं है जो जबरदस्ती से होने जा रहा है. यह स्वैच्छिक आधार पर होगा. इसलिए, अगर ऐसे देश हैं जो फिलिस्तीनियों को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं, जो शरणार्थियों को लेना चाहते हैं, तो ऐसा किया जा सकता है.”
पिछले महीने व्हाइट हाउस लौटने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने जिस पहले विदेशी मेहमान का स्वागत किया वह इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू थे.
ट्रंप के शासनकाल में इजरायल और अमेरिका के बेहतर रिश्तों की आशा व्यक्त करते हुए अजार ने कहा, “हम आशावादी हैं क्योंकि हमने देखा है कि पहले ट्रंप प्रशासन ने इस क्षेत्र के लिए क्या किया. हम अब्राहम समझौते पर पहुंचे और इसराइल को उस प्रशासन से बहुत महत्वपूर्ण उपलब्धियां मिलीं, जिनमें हमारी राजधानी यरुशलम को अमेरिकी मान्यता, अमेरिकी दूतावास को यरुशलम ले जाना, गोलान हाइट्स पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता देना और कई अन्य चीजें शामिल हैं. इसलिए, हमें उम्मीद है कि इस ट्रंप प्रशासन के साथ, हम और अधिक हासिल कर सकते हैं.”
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