नई दिल्ली, 26 फरवरी . भारत में इजरायल के राजदूत रियुवेन अजार ने एफ-35 फाइटर जेट को लेकर संभावित भारत-अमेरिकी डील का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि यह विमान भारतीय वायु सेना को वैसी ही मजबूती देगा जैसी इसने इजरायली एयर फोर्स की दी.
अजार ने बुधवार को को दिए एक विशेष इंटरव्यू में कहा, “मुझे लगता है कि सैन्य क्षेत्र में उन्नत तकनीकें प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. हमें पहले ही एफ-35 के कई स्क्वाड्रन मिल चुके हैं और ये मध्य पूर्व के आसमान पर इजरायल का वर्चस्व कायम करते हुए खुद को साबित कर रहे हैं. अगर भारत भी एफ-35 हासिल करता है, तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि इससे उसे भी ऐसा ही फायदा होगा.”
इस महीने की शुरुआत में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, ‘‘इस साल से हम भारत को सैन्य बिक्री में कई अरब डॉलर का इजाफा करेंगे.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत को अंततः ‘एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू लड़ाकू विमान’ देने का रास्ता भी साफ कर रहे हैं.’’
अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान अगर भारत को मिलता है तो वह नाटो सहयोगियों के बराबर आ जाएगा, क्योंकि केवल इन चुनिंदा देशों को ही एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने का विशेषाधिकार प्राप्त है. केवल दो अन्य देश जिन्हें ‘प्रतिबंधों’ से अलग रखा गया है, वे हैं इजरायल और जापान.
इजरायली सरकार ने अक्टूबर 2010 में ‘लॉकहीड मार्टिन एफ-35 लाइटनिंग II’ को इजरायली वायु सेना के अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान के रूप में चुनने का फैसला किया था.
इजरायल पहला देश था जिसने लॉकहीड मार्टिन एफ-35 प्राप्त किया – जिसे सबसे शक्तिशाली और सक्षम विमानों में से एक माना जाता है.
इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) में सेवा में आने वाले किसी भी अन्य विमान की तरह, एफ-35 को हिब्रू नाम ‘हा-अदिर’ (महान) मिला.
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