दक्षिण कोरिया मार्शल लॉ विवाद : राष्ट्रपति यून की मुश्किलें बढ़ीं, विपक्ष लाया महाभियोग प्रस्ताव

सोल, 4 दिसंबर (योनहाप). मार्शल लॉ लागू करने और फिर कुछ घंटों में वापस लेने के फैसले ने राष्ट्रपति यूं सुक येओल की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बुधवार को विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ महाभियोग चलाने का प्रस्ताव पेश किया. मुख्य विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ रीबिल्डिंग कोरिया पार्टी और रिफॉर्म पार्टी सहित पांच अन्य छोटी विपक्षी पार्टियों ने दोपहर 2:43 (स्थानीय समायुनुसार) बजे नेशनल असेंबली में बिल ऑफिस में प्रस्ताव पेश किया.

बता दें राष्ट्रपति यून सुक-योल ने देश में मंगलवार रात मॉर्शल लॉ लगाने की घोषणा की थी. हालांकि बुधवार सुबह उन्हें अपना फैसला पलटना पड़ा.

योनहाप समाचार एजेंसी के मुताबिक महाभियोग प्रस्ताव पर 190 विपक्षी सांसदों और एक स्वतंत्र सांसद ने हस्ताक्षर किए. हालांकि सत्तारूढ़ पार्टी के किसी भी सांसद ने इसका समर्थन नहीं किया है जबकि पीपुल्स पावर पार्टी (पीपीपी) के नेता हान डोंग-हून ने मार्शल लॉ लगाए जाने का विरोध किया था.

विपक्षी दलों की योजना इस प्रस्ताव को गुरुवार को संसद के पूर्ण अधिवेशन में प्रस्तुत करने और शुक्रवार या शनिवार को मतदान करने की है.

कानून के अनुसार, महाभियोग प्रस्ताव को पूर्ण सत्र में प्रस्तुत किए जाने के 24 से 72 घंटों के भीतर मतदान के लिए रखा जाना चाहिए.

रीबिल्डिंग कोरिया पार्टी के प्रतिनिधि शिन चांग-सिक ने कहा कि पार्टियों ने अभी तक यह फैसला नहीं लिया है कि मतदान ‘तुरंत’ किया जाएगा या ’72 घंटों के भीतर’ किसी अन्य समय पर.

महाभियोग प्रस्ताव को संसद में पारित होने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत पड़ती है. 300 सदस्यीय नेशनल असेंबली में विपक्ष को विधेयक पारित करने के लिए सत्तारूढ़ पीपुल पावर पार्टी के आठ वोटों की जरूरत होगी.

वहीं देश के रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून ने बुधवार को माफी मांगी और इस्तीफे की पेशकश की. किम ने एक बयान में कहा, “मैंने इमरजेंसी मार्शल लॉ की वजह से पैदा हुई उथल-पुथल की जिम्मेदारी लेते हुए राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है.” आरोप है कि किम ने कथित तौर पर मार्शल लॉ घोषित करने का प्रस्ताव रखा था. उनकी इस्तीफे की मांग विपक्षी दलों ही नहीं बल्कि सत्तारूढ़ पार्टी की तरफ से भी गई.

इससे पहले मार्शल लॉ की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति यून ने एक टीवी संबोधन में कहा कि देश की उदारवादी संवैधानिक व्यवस्था को बचाने के लिए ऐसा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मार्शल लॉ की उनकी घोषणा का उद्देश्य ‘राज्य विरोधी ताकतों को खत्म करना’ है. उन्होंने विपक्ष पर सार्वजनिक अधिकारियों के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाकर सरकार को ‘पंगु’ करने और प्रस्तावित राष्ट्रीय बजट को कम करने का आरोप लगाया.

यून की मार्शल लॉ की घोषणा का न सिर्फ विपक्षी पार्टियों ने बल्कि उनकी अपनी सत्ताधारी दल पीपुल्स पावर पार्टी (पीपीपी) ने भी विरोध किया.

पीपीपी अध्यक्ष हान दोंग-हून ने ने राष्ट्रपति यून सूक योल से अपील की कि वे अपने उस फैसले की व्याख्या करें, जिसमें उन्होंने आपातकालीन मार्शल लॉ घोषित किया था.

हान ने नेशनल असेंबली में कहा, “राष्ट्रपति यून को इस विनाशकारी स्थिति के बारे में सीधे तौर पर बताना चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी जवाबदेही देनी चाहिए, जिसमें मार्शल लॉ का प्रस्ताव देने वाले रक्षा मंत्री को तत्काल बर्खास्त करना भी शामिल है.”

मीडिया रिपोट्स के मुताबिक राष्ट्रपति यून सुक-योल पीपुल्स पावर की लोकप्रियता रेटिंग लगातार कम हो रही है. उनकी पत्नी भी कुछ कथित घोटालों और विवादों से जुड़ी रही हैं.

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