भुवनेश्वर, 29 अगस्त . ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में Friday को अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण समितियों के अध्यक्षों का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जो Saturday तक चलेगा, जिसे ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने राज्य और देश के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बताया.
यह सम्मेलन करीब 31 वर्षों के अंतराल के बाद ओडिशा में फिर से आयोजित हो रहा है, जिसमें संसद और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं की एससी/एसटी समितियों के अध्यक्षों और सदस्यों ने हिस्सा लिया.
इस दो दिवसीय सम्मेलन में लगभग 20 राज्यों के प्रतिनिधि, Union Minister फग्गन सिंह कुलस्ते और Lok Sabha एवं राज्यसभा के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.
विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए से कहा, “इस सम्मेलन का मुख्य मकसद विभिन्न राज्यों में एससी/एसटी कल्याण समितियों की सिफारिशों, अध्ययनों और कार्यान्वयन की स्थिति पर विचार-विमर्श करना है. साथ ही, यह एक ऐसा मंच है जहां सभी राज्य एक-दूसरे से सीख सकते हैं और बेहतरीन नीतियों का आदान-प्रदान कर सकते हैं.”
उन्होंने यह भी बताया कि ओडिशा जैसे जनजातीय बहुल राज्य में इस प्रकार का सम्मेलन होना विशेष महत्व रखता है. उन्होंने कहा, “यह गर्व की बात है कि हमारे राज्य से देश के राष्ट्रपति और Chief Minister दोनों ही आते हैं. State government अनुसूचित जातियों और जनजातियों के कल्याण के लिए जमीनी स्तर से लेकर उच्च स्तर तक पूरी तरह से समर्पित है.”
सुरमा पाढ़ी ने आगे कहा कि यह सम्मेलन केवल एक बैठक नहीं, बल्कि विचारों के आदान-प्रदान और सहयोगात्मक रणनीतियों को साझा करने का एक सशक्त मंच है. उन्होंने कहा, “इसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना है.”
विधानसभा अध्यक्ष ने इस मौके पर उम्मीद जताई कि सम्मेलन के माध्यम से जो चर्चाएं होंगी, वे देशभर में एससी/एसटी वर्गों के कल्याण के लिए नए रास्ते खोलेंगी और नीतिगत फैसलों में सकारात्मक बदलाव लाएंगी.
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वीकेयू/डीएससी