लोकसभा स्पीकर बिरला की श्रीलंका-भारत संसदीय मैत्री प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात, संसदीय संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

कोलंबो, 29 अगस्त . भारत और श्रीलंका के बीच संसदीय संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. श्रीलंका-भारत संसदीय मैत्री संघ के 24 सदस्यीय उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने New Delhi में Lok Sabha सचिवालय के संसदीय अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड) के दौरे के दौरान Lok Sabha अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की.

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्रीलंका के स्वास्थ्य और जनसंचार मंत्री तथा श्रीलंका-भारत संसदीय मैत्री संघ के अध्यक्ष नलिंदा जयतिस्सा ने किया.

इस बैठक के दौरान, Lok Sabha अध्यक्ष ओम बिरला ने भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति और महासागर (म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ एक्रॉस रीजन) दृष्टिकोण में श्रीलंका के महत्व को रेखांकित किया. इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आदान-प्रदान को बढ़ाने का आह्वान किया.

श्रीलंका में भारत के उच्चायोग ने Friday को social media प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “श्रीलंका-भारत संसदीय मैत्री संघ के प्रतिनिधिमंडल ने Lok Sabha प्राइड के दौरे के दौरान Lok Sabha अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की. अध्यक्ष ने भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति और महासागर दृष्टिकोण में श्रीलंका के विशेष पर प्रकाश डाला और भारत-श्रीलंका के बीच और अधिक आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया.”

बिरला ने श्रीलंका के संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात पर खुशी व्यक्त की, जो प्राइड द्वारा आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए भारत आए हैं. उन्होंने इस तरह के आदान-प्रदान को संसदीय कूटनीति को मजबूत करने और भारत-श्रीलंका के बीच लोकतांत्रिक सहयोग को गहरा करने वाला बताया.

हाल के उच्च-स्तरीय आदान-प्रदानों का जिक्र करते हुए बिरला ने अप्रैल 2025 में Prime Minister Narendra Modi की श्रीलंका यात्रा और दिसंबर 2024 में श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके की भारत यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों में मील का पत्थर बताया.

बिरला ने श्रीलंका की संसद में भारत-श्रीलंका संसदीय मैत्री संघ की स्थापना का स्वागत किया और इसे द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती का प्रतीक बताया. उन्होंने दोनों देशों की संसदों के बीच संस्थागत सहयोग और नियमित संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि लोकतांत्रिक प्रथाओं और निर्वाचित प्रतिनिधियों के अनुभवों को साझा किया जा सके. उन्होंने कहा कि ऐसे आदान-प्रदान लोकतांत्रिक मूल्यों को और मजबूत करेंगे.

बिरला ने भारत और श्रीलंका की साझा विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक और जन-जन के बीच गहरे संबंध हैं, जो द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख आधार हैं. उन्होंने रामायण और बौद्ध पर्यटन सर्किट के विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और बढ़ते जन-जन के संपर्क को इन संबंधों की मजबूत नींव बताया.

बिरला ने प्राइड की 110 से अधिक देशों के विधायकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की भूमिका को भी साझा किया और भारत की इन नवाचारों को अन्य देशों के साथ साझा करने की तत्परता व्यक्त की.

दूसरी ओर, नलिंदा जयतिस्सा ने श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत द्वारा पहली प्रतिक्रिया देने के लिए आभार व्यक्त किया. उन्होंने भारतीय महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में भारत की भूमिका की सराहना की और स्वास्थ्य व शिक्षा में भारत के सहयोग को श्रीलंका के लिए जीवन रेखा बताया.

श्रीलंकाई संसदीय प्रतिनिधिमंडल 26 से 30 अगस्त तक भारत की यात्रा पर है. इसमें 20 सांसद और 4 संसदीय कर्मचारी शामिल हैं.

एफएम/