Sunday , 25 July 2021

78 फीसदी कम हैं बालरोग विशेषज्ञ, ऑक्सीजन-बिस्तर पर जोर

नई दिल्ली (New Delhi) . कोरोना की तीसरी लहर से पहले सरकार ने बच्चों को लेकर गाइडलाइन जारी की है. इसमें अनुमान लगाया है कि अगर तीसरी लहर में रोजाना एक लाख मरीजों का पीक आता है तो उसमें बच्चों की संख्या करीब 12 हजार होगी.

इसलिए राज्यों से अस्पतालों में बिस्तर की जरूरत होगी बढ़ाने और ऑक्सीजन का पर्याप्त बंदोबस्त करने के लिए कहा है इस पर राज्यों ने काम करना भी शुरू कर दिया है. अनुमान है कि करीब 2400 आईसीयू बेड की जरूरत पड़ेगी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ही अनुसार देश में 78 फीसदी बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह स्थिति और भी ज्यादा गंभीर है क्योंकि वहां अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या भी पूरी नहीं है. जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाना ही काफी नहीं है. कम स्टाफ की चुनौती पर भी सरकारों को काम करना चाहिए. गाइडलाइन में एनसीडीसी की समीक्षा का हवाला देते हुए केंद्र ने कहा कि नई लहर में अगर हर दिन 12 हजार बच्चे संक्रमित हुए तो इनमें से करीब 600 को भर्ती करने की जरूरत पड़ सकती है.

इनमें से 360 बच्चों को सामान्य वार्ड और 240 बच्चों को आईसीयू बिस्तर की जरूरत पड़ सकती है.गाइडलाइन में केंद्र ने कहा कि 300 या उससे अधिक बिस्तर वाले जिला अस्पतालों में बच्चों के लिए अलग से वार्ड होना चाहिए. संक्रमित बच्चे के साथ उसके माता पिता को भी प्रवेश दिया जाएगा. जिला अस्पताल पर 3:1 के हिसाब से आईसीयू बेड का बंदोबस्त करना होगा. साथ ही प्रति मिनट 5 लीटर ऑक्सीजन की व्यवस्था भी करनी होगी. देश में 20 वर्ष से कम आयु के 12 फीसदी मामले अब तक सामने आए हैं. पहली और दूसरी लहर में लगभग बराबर बच्चे संक्रमित हुए हैं.

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