50 डिग्री सेल्सियस से अधिक वाले गर्म दिनों की संख्या दोगुनी हुई, दुनिया के लिए खतरे की घंटी – Daily Kiran
Sunday , 24 October 2021

50 डिग्री सेल्सियस से अधिक वाले गर्म दिनों की संख्या दोगुनी हुई, दुनिया के लिए खतरे की घंटी

नई दिल्‍ली . देश-दुनिया में विभिन्‍न स्‍तर पर वैश्विक जलवायु संकट देखा जा रहा है.इसकी कठोर वास्तविकताओं को दर्शाने वाले विश्लेषण में दावा हुआ है कि एक साल में अत्यधिक गर्म दिनों की संख्या (जब तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है) 1980 के दशक से दुनिया भर में दोगुनी हुई है.जलवायु से जुड़े अध्ययन में कहा गया है कि जिन दिनों में पारा 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है, उनकी संख्या 1980 के बाद से हर दशक में लगातार बढ़ रही है. रिपोर्ट में दावा किया है कि 1980 से 2009 के बीच तापमान औसतन 50 डिग्री सेल्सियस प्रति वर्ष 14 दिनों के ऊपर चला गया है.लेकिन 2010 और 2019 के बीच संख्या 26 दिनों तक बढ़ गई थी. इसके अलावा इसी समयावधि के दौरान 45 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी तेज उछाल देखा गया है, जो औसतन प्रति वर्ष दो हफ्ते अतिरिक्त दर्ज किया गया है.

पश्चिम एशियाई क्षेत्रों में 50 डिग्री सेल्सियस के ऊपर तापमान पहुंचना आम है, खासकर लंबी गर्मियों के दौरान यह एक सामान्य सी बात हैं. लेकिन जलवायु वैज्ञानिकों ने गौर किया कि गर्मी में कनाडा और इटली जैसे दुनिया के अधिक समशीतोष्ण भागों में लगभग 50 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया.इटली में रिकॉर्ड स्तर पर तापमान 48.8 डिग्री सेल्सियस और कनाडा में पारा 49.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया.

जलवायु वैज्ञानिकों को डर है कि जब तक जीवाश्म ईंधन के उत्सर्जन को सीमित नहीं रखा जाता है, तब तक खतरनाक 50 डिग्री सेल्सियस तापमान दुनिया के और हिस्सों में भी दर्ज किया जा सकता है.अगर ग्रह के अधिक से अधिक समशीतोष्ण भागों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ जाता है,तब पूरी मानव जाति को अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.जलवायु शोधकर्ता का कहना है, हमें जल्दी से इस संबंध में कदम उठाने की जरूरत है.हम जीवाश्म ईंधन के उत्सर्जन में जितनी तेजी से कटौती करें, उतना ही बेहतर होगा.उन्‍होंने कहा, लगातार उत्सर्जन और निर्णायक कदमों के प्रयासों की कमी के साथ न केवल अत्यधिक गर्मी की घटनाएं गंभीर और नियमित हो जाएंगी, बल्कि आपातकालीन प्रतिक्रिया और इससे उबरना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा.जलवायु वैज्ञानिकों को डर है कि जीवाश्म ईंधन के बेलगाम जलने से पूरी दुनिया पहले की तुलना में तेजी से गर्म हो रही है, जिससे भविष्य में अत्यधिक तापमान की आशंका बढ़ जाएगी. विश्लेषण बताता है कि अत्यधिक तापमान वनस्पतियों और जीवों के लिए खतरनाक हो सकता है.

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