Monday , 26 July 2021

छत्तीसगढ़ में 39.1 फीसदी लोग किसी न किसी प्रकार से तंबाकू का सेवन कर रहे…

जगदलपुर . नशे से होने वाले दुष्प्रभावों व उनसे बचाव के बारे में जानकारी देने के लिये एनसीसी कैडेट्स को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया. यह प्रशिक्षण शासकीय उद्यानिकी महाविद्यालय जगदलपुर में जिला स्तरीय एनसीसी संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर के दौरान दिया गया.

नशामुक्ति प्रक्षिक्षण में मनोवैज्ञानिक सलाहकार उमाशंकर साहू ने बताया कि नशा एक ऐसी आदत है जो समाज मे तेजी से फैल रही है. यह युवा पीढ़ी को लगातार अपनी चपेट में लेकर उसे कई तरह से बीमार कर रही है. शराब, सिगरेट, तम्बाकू जैसे जहरीले पदार्थों का सेवन कर युवा वर्ग का एक बड़ा हि?स्सा नशे का शिकार हो रहा है जिससे उनका शरीरिक, मानसिक व आर्थिक नुकसान भी हो रहा है. किसी भी तरह के नशे से मुक्त होने की सबसे अच्छी विधि यही है कि खुद को ज्यादा से ज्यादा व्यस्त रखें. ज्यादातर मामलों में लोग तनाव की वजह से नशे के आदी बनते हैं. ऐसे में खुद को सकारात्मक और सृजनात्मक गतिविधियों में संलिप्त रखें, इससे तनाव दूर होगा.उन्होंने बताया कि हमारे समाज मे ऐसे बहुत से लोग हैं जो नशे के आदि हो चुके हैं. उन्हें सही दिशा में लाने के लिये संयुक्त प्रयास करना होगा. जन जागरण एवं उचित परामर्श से नशे का इलाज संभव है.

एनसीसी कैडेट्स को संबोधित करते हुए बटालियन के कमान अधिकारी कर्नल एम.एम.कट्टी ने युवाओं को नशे का त्याग कर शारीरिक व मानसिक तौर पर मजबूत रहने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है कि नशा एक भयंकर बीमारी का रूप लेता जा रहा है जो युवा पीढ़ी को लगातार अपनी गिरफ्त में ले रहा है. इससे समाज में कैंसर जैसी कई लाइलाज बीमारी भी तेजी से पैर पसार रही हैं. शराब, सिगरेट, तंबाकू, एवं ड्रग्स जैसे जहरीले पदार्थ के सेवन ने युवाओं को अपराध के रास्ते पर धकेलना शुरू कर दिया. नशा अपराध की दुनिया की पहली सीढ़ी है. इसलिए हमें अच्छे समाज की रचना के लिए नशे पर अंकुश लगाना होगा. इस कार्यक्रम के संदेश को हमे अन्य लोगों तक लेकर जाना है और उन्हें जागरूक करना है. कार्यक्रम के दौरान सभी कैडेट्स को तंबाकू का सेवन न करने की शपथ दिलाई गयी. साथ ही कोटपा अधिनियम 2003 के बारे में जानकारी दी गयी. इस अधिनियम की विभिन्न धाराओं में उल्लेख है की 18 वर्ष से कम आयु वर्ग को तंबाकू पदार्थ बेचना, शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू पदार्थ बेचना, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना अपराध है. तंबाकू पदार्थों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष विज्ञापन पर पूर्ण प्रतिबंध है.

तंबाकू पदार्थों को बेचने वाली दुकान पर लगे बोर्ड चमकदार (बिजली युक्त) नहीं होना चाहिए. टेलीविजन व फिल्मों में तंबाकू के दृश्यों को दिखाना अपराध है. उक्त नियमों को उल्लंघन पर 1 से 5 वर्ष की कैद 1,000 रुपए से 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है. ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे 2016-17 का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में 39.1 प्रतिशत लोग किसी न किसी प्रकार से तंबाकू का सेवन करते हैं. यह देश की औसत 28.4 प्रतिशत से अधिक है. इसमें से 7 प्रतिशत लोग ऐसे थे जिन्होंने 15 वर्ष की उम्र से पहले ही तम्बाकू का सेवन शुरू किया था. 29 प्रतिशत ने 15-17 वर्ष की उम्र से और 35.4 प्रतिशत ने 18-19 वर्ष में सेवन शुरू किया. यानी औसतन 18.5 वर्ष की आयु में तंबाकू का सेवन शुरू किया था.

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