Friday , 22 January 2021

प्रदेश में इस वर्ष 26 बाघों की मौत

भोपाल (Bhopal) . टाइगर स्‍टेट का दर्जा प्राप्‍त मध्य प्रदेश में इस वर्ष अब तक 26 बाघों की मौत हुई है. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के अनुसार इस साल अप्रैल से 26 बाघों की मौत हुई है. इनमें से 21 बाघों की मौत राज्‍य के विभिन्‍न टाइगर रिजर्व के अंदर हुई और इनमें सबसे अधिक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मारे गए 10 बाघ शामिल हैं.

tigers-mp

इस मामले में वन मंत्री विजय शाह ने कहा है कि पिछले छह वर्षों में राज्य में बाघों की जन्म दर की तुलना में बाघों की औसत मृत्यु दर कम थी. एनटीसीए के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष के पहले तीन महीनों में किसी भी बाघ की मौत नहीं हुई.

साल 2019 में राज्य ने 28 बाघ खोए थे और अवैध शिकार के कारण शरीर के अंगों की तस्‍करी के तीन मामले भी सामने आए. कर्नाटक (Karnataka), जो देश में बाघों की संख्या में दूसरे स्थान पर है, आंकड़ों के अनुसार वहां इस साल आठ बाघों की मौतें हुई हैं. देश के दक्षिणी राज्य में पिछले साल 12 बाघों की मौत हुई.

शाह ने कहा अभी मध्य प्रदेश में 124 बाघ शावक हैं. शावकों की गणना पिछली जनगणना (2018 में) के दौरान नहीं की गई थी. अगली गणना में हमारे पास 600 से अधिक बाघ होने वाले हैं.

उन्होंने कहा, हमारे पास उनके लिए क्षेत्र की तुलना में अधिक बाघ हैं. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का उदाहरण लें. इसमें 125 बाघ हैं जबकि इसमें केवल 90 घर हैं. मंत्री ने बांधवगढ़ में बाघों की बड़ी संख्या में मौत के लिए क्षेत्र और प्रभुत्व के लिए होने वाली लड़ाई को जिम्मेदार ठहराया.

इससे पहले मध्य प्रदेश ने साल 2010 में ‘टाइगर स्टेट’ टैग कर्नाटक (Karnataka) के हाथों खो दिया था, जिसका मुख्य कारण पन्ना टाइगर रिजर्व में कथित अवैध शिकार था. उस समय कर्नाटक (Karnataka) में 300 की तुलना में एमपी में 257 बाघ थे.

साल 2014 की बाघ गणना में मध्य प्रदेश की स्थिति उत्तराखंड (340) और कर्नाटक (Karnataka) (408) के बाद 308 बाघों के साथ देश में नंबर 3 पर फिसल गई. हालाँकि, एमपी ने 2018 की गणना में 526 बाघों के साथ एक बार फिर टाइगर स्टेट का टैग हासिल किया.

कर्नाटक (Karnataka) में पाँच बाघ अभयारण्य हैं और वहाँ बाघों की संख्या (अंतिम गणना के अनुसार) मध्य प्रदेश की तुलना में महज दो ही कम थी, जबकि मध्‍य प्रदेश में छह बाघ अभयारण्य हैं.


Please share this news