Tuesday , 15 June 2021

2500 करोड़ का होगा भोपाल नगर निगम का बजट

भोपाल (Bhopal) . इस बार भोपाल (Bhopal) नगर निगम का बजट करीब 2500 करोड़ रूपए का होगा. अधिकारियों ने बजट का खाका तैयार कर लिया है. इस बार जहां संपत्ति और जल दर में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी, वहीं कई विकास कार्यों के लिए फंड भी नहीं मिलेगा.

सूत्रों के अनुसार प्रदेश सरकार ने संपत्ति कर को कलेक्टर (Collector) गाइडलाइन से जोडऩे का निर्णय लिया है, लेकिन नगर निगम इसे अगले वित्त वर्ष से लागू नहीं कर रहा है. इसी तरह केंद्र सरकार (Central Government)की गाइडलाइन के अनुसार पानी का बिल 270 रुपए तक करने और अन्य यूजर चार्जेस बढ़ाने के प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में चले गए हैं. नगर निगम के अफसरों ने अगले वित्त वर्ष का बजट तैयार कर लिया है. लगभग ढाई हजार करोड़ रुपए के इस बजट में करीब 100 करोड़ रुपए शहर की साफ-सफाई व्यवस्था और स्वच्छ भारत मिशन पर खर्च करने का प्रावधान रखा गया है.

नई परिषद के गठन पर तय होगी संपत्तिदर

फिलहाल संपत्ति कर एनुअल रेंटल वैल्यू के आधार पर तय होता है. लेकिन इसे टैक्सेबल प्रॉपर्टी वैल्यू के आधार पर तय होना है. हालांकि इसमें दस फीसदी से अधिक वृद्धि करने पर प्रतिबंध है. फिलहाल यह निर्णय नई परिषद के गठन होने तक के लिए टाल दिया गया है. हालांकि इस साल नगर निगम की वसूली में काफी सुधार हुआ है. अनुमान लगाया जा रहा है कि वित्त वर्ष के अंत तक 300 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार हो जाएगा. यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा होगा. लेकिन इसके बावजूद पुरानी देनदारियां और राज्य शासन द्वारा चुंगी क्षतिपूर्ति आदि में कटौती किए जाने से नई परिषद को खजाना खाली मिलेगा.

पानी का बिल 270 रुपए महीना करने का प्रस्ताव

केंद्र सरकार (Central Government)ने निकायों की आर्थिक स्थिति दुरुस्त करने के लिए राज्यों को गाइडलाइन भेजी है. इसमें पानी सप्लाई और साफ-सफाई सहित अन्य नागरिक सुविधाओं पर होने वाले खर्च की पूरी लागत वसूलने की बात कही गई है. इस हिसाब से भोपाल (Bhopal) नगर निगम ने पानी का बिल 180 रुपए से बढ़ाकर 270 रुपए महीना करने का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा था. यह प्रस्ताव शासन के पास ही अटका हुआ है. नियमानुसार निगम बजट में शुल्क बढ़ा सकता है, लेकिन इसे भी लंबित रखा जा रहा है.

विकास निधि नहीं मिलेगी

शहर के वार्डों में होने वाले विकास कार्यों के लिए नगर निगम के बजट में रहने वाली लगभग 90 करोड़ रुपए की निधि इस बार भी नहीं मिलेगी. निगम परिषद नहीं होने से वार्ड विकास निधि, महापौर निधि और परिषद अध्यक्ष निधि आदि का प्रावधान नहीं किया जा रहा है. निगम का पिछला बजट भी ऐसा ही बना था. इसका नतीजा यह होगा कि वार्डों में होने वाले सड़क, नाली और बाउंड्रीवॉल के निर्माण पर रोक लग जाएगी. नगर निगम कमिश्नर वीएस चौधरी कोलसानी ने कहा कि वर्तमान में परिषद नहीं है, इसलिए वार्डों के विकास के लिए अलग से राशि का कोई औचित्य नहीं है. जो कार्य चल रहे हैं उनके लिए प्रावधान होगा, बाकी विभागवार बजट बनेगा.

हर पार्षद का कोटा होता था

नगर निगम परिषद के गठन पर सांसद (Member of parliament) और विधायक की तरह हर पार्षद का कोटा होता था. इसमें 25 लाख रुपए और वार्ड से जमा होने वाले संपत्ति कर का पचास प्रतिशत हिस्सा शामिल होता था. औसतन हर वार्ड में 75 लाख से सवा करोड़ रुपए तक की निधि इक_ा हो जाती थी. इसके अलावा 5 करोड़ रुपए महापौर कोटा और 1.50 करोड़ रुपए परिषद अध्यक्ष की निधि थी. इसके अलावा पार्षद अपने प्रयास करके विधायक और सांसद (Member of parliament) निधि भी अपने वार्ड के लिए लेकर आते थे. खास तौर से किसी बड़े विकास कार्य के लिए सभी निधि मिलाकर एस्टीमेट बन जाता था. एक- एक वार्ड में औसत 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपए तक के काम हो जाते थे.

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