Saturday , 19 June 2021

18 जनवरी को कोर्ट ने दो हफ्ते में मांगे थे मुद्दे

भोपाल (Bhopal) . अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति के रास्ते खोलने को लेकर सरकार की चिंता किसी से छिपी नहीं है. आईएएस अधिकारियों की समिति बनाकर इसका तोड़ भी निकाला जा रहा है, पर 18 जनवरी को मांगी जानकारी सरकार ने अब तक नहीं भेजी है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, बिहार (Bihar) और महाराष्ट्र (Maharashtra) सरकारों के साथ अपीलार्थियों से दो हफ्ते में वे मुद्दे सुझाने को कहा था, जिन पर निर्णय होना है. कोर्ट का कहना था कि सभी राज्यों के मुद्दे अलग-अलग हैं. इसलिए सरकारें और अपीलार्थी अपने मुद्दे अटॉर्नी जनरल को उपलब्ध करा दें. वे उन्हें एकजाई कर कोर्ट में प्रस्तुत करेंगे. जिससे फैसला जल्द हो सकेगा. जरूरत होगी, तो अटॉर्नी जनरल राज्यों से नोट आने के बाद वकीलों के साथ सम्मेलन भी कर सकते हैं.

पदोन्नति में आरक्षण की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में निर्णायक स्थिति में है. कोरोना संक्रमण के करीब नौ महीने बाद फिर से सुनवाई शुरू हुई, तो सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने स्थिति स्पष्ट करने को कहा. 18 जनवरी की सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि सभी राज्यों से आए मुद्दे एक जैसे नहीं हैं. इसलिए सभी राज्यों को अलग से मुद्दे बताना चाहिए. (उदाहरण के लिए-मध्य प्रदेश में वरिष्ठ पदों पर आरक्षित वर्ग को प्रतिनिधित्व ज्यादा दिए जाने का मुद्दा है.) ऐसे ही मुद्दे अनारक्षित और आरक्षित वर्ग (अपीलार्थी) से मांगे गए हैं. अपीलार्थी अपने मुद्दे वकील के माध्यम से भेज चुके हैं, जबकि सरकार अब तैयारी कर रही है.

उल्लेखनीय है कि कर्मचारियों की याचिकाओं की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2016 को लोक सेवा (पदोन्नति) नियम 2002 खारिज किया है. तब से प्रदेश में पदोन्नति पर रोक है. इन चार साल 11 महीने में करीब 70 हजार कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं. इनमें से करीब 40 हजार कर्मचारियों को पात्रता रखते हुए भी पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पाया है.

Please share this news