12वीं की परीक्षा में 600 में 562.5 लाने वाली छात्रा ने नीट में फेल होने पर की खुदकुशी, अब तक 16 बच्चे दे चुके हैं जान – Daily Kiran
Saturday , 23 October 2021

12वीं की परीक्षा में 600 में 562.5 लाने वाली छात्रा ने नीट में फेल होने पर की खुदकुशी, अब तक 16 बच्चे दे चुके हैं जान

चेन्नई (Chennai) . राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में शामिल होने वाली एक 17 वर्षीय छात्रा ने तमिलनाडु (Tamil Nadu) के अरियालुर जिला स्थित अपने गांव में आत्महत्या कर ली है. राज्य में दो दिनों के भीतर इस तरह की मौत का यह दूसरा मामला है. नीट परीक्षा को लेकर तमिलनाडु (Tamil Nadu) में अब तक 16 बच्चे आत्महत्या कर चुके हैं. इस घटना को लेकर मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके ने राज्य में सत्तारूढ़ डीएमके सरकार पर निशाना साधा है, जबकि मुख्यमंत्री (Chief Minister) एम के स्टालिन ने परीक्षा नहीं कराने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया.

छात्रा की मौत के कुछ घंटों बाद मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि नीट को पूरी तरह से हटाने के कानूनी संघर्ष में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी. गत 13 सितंबर को विधानसभा में एक विधेयक के पारित होने का जिक्र करते हुए स्टालिन ने कहा शुरू से ही, हम नीट का विरोध कर रहे हैं, जो तमिलनाडु (Tamil Nadu) के छात्रों के मेडिकल शिक्षा हासिल करने के सपने को चकनाचूर कर रहा है. हमने विधेयक के पारित होने के साथ पूरी तरह से कानूनी संघर्ष शुरू कर दिया है.
विधेयक को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को छोड़कर सभी दलों द्वारा समर्थन दिया गया है. उन्होंने कहा कि जब तक विधेयक को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक नीट को हटाने के मामले में कोई समझौता नहीं होगा. उन्होंने कहा हमारी सरकार नीट को हटाने के लिए हर संभव कदम उठा रही है, जो शिक्षा में समानता को खत्म कर रही है.

विधेयक में बारहवीं कक्षा के अंकों के आधार पर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश का प्रावधान किया गया है. स्टालिन ने लड़की की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि वे अपना दृष्टिकोंण बदलें. उन्होंने माता-पिता से अपने बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करने का अनुरोध किया और कहा आइए हम जीवन बचाने वाली चिकित्सा शिक्षा के लिए एक जीवन को समाप्त होने से रोकें. कानूनी संघर्ष के माध्यम से नीट को हटाएं.

मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की. मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक ने मांग की कि सत्तारूढ़ द्रमुक को नीट पर अपनी राजनीतिक नौटंकी को बंद करना चाहिए. वही सत्तारूढ़ दल ने केंद्र पर फिर से निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एक ‘साजिश’ थी और कहा कि आत्महत्या समाधान नहीं है. पुलिस (Police) ने बताया कि कनिमोझी (17) ने यह कदम तब उठाया जब उसके माता-पिता 13 सितंबर की रात घर से बाहर गए हुए थे और जब वे घर लौटे तो उन्होंने उसे फांसी पर लटका हुआ पाया. उन्होंने बताया कि वह रविवार (Sunday) को राष्ट्रीय परीक्षा में शामिल हुई थी और उसने अपने माता-पिता से कहा था कि कुछ प्रश्न कठिन थे और वह परिणाम को लेकर चिंतित थी. अधिकारी ने बताया कि इस मामले में जांच जारी है.
इससे पहले 19 वर्षीय लड़के धनुष ने परीक्षा देने से कुछ घंटे पहले 12 सितंबर को आत्महत्या कर ली थी. द्रमुक की युवा शाखा के सचिव तथा मुख्यमंत्री (Chief Minister) एम के स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि छात्र (student) की मौत से उन्हें भारी मानसिक पीड़ा पहुंची है. अन्नाद्रमुक के शीर्ष नेता के पलानीस्वामी ने कनिमोझी की मौत पर शोक और दुख व्यक्त करते हुए छात्र (student) समुदाय से इस तरह के कदम नहीं उठाने की अपील की और कहा कि जीवन जीने के लिए है और उनके लिए बहुत सारे पाठ्यक्रम खुले हैं और जीवन में केवल चिकित्सा शिक्षा ही नहीं है. तमिलनाडु (Tamil Nadu) में अब तक 16 बच्चों ने नीट के चलते आत्महत्या की है. पुलिस (Police) ने कहा कि मृतक छात्रा नीट परीक्षा में अपने रिजल्ट को लेकर बेहद चिंतित थी.

अन्नाद्रमुक के समन्वयक और पूर्व मुख्यमंत्री (Chief Minister) ओ पनीरसेल्वम ने छात्रों से इस तरह के कदम नहीं उठाने की अपील की और शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की. एमडीएमके प्रमुख वाइको ने भाजपा नीत केंद्र से नीट से छूट संबंधी तमिलनाडु (Tamil Nadu) के विधेयक को मंजूरी देने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि राज्य में नीट को लेकर आत्महत्याओं का सिलसिला समाप्त होना चाहिए. उन्होंने नीट की परीक्षा देने वाले छात्रों से साहस और हिम्मत के साथ जीवन का सामना करने का अनुरोध किया. पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) नेता और राज्यसभा सदस्य अंबुमणि रामदॉस ने कहा कि कनिमोझी ने अपनी बारहवीं कक्षा की परीक्षा में 600 में से 562.5 हासिल किए थे, और यदि नीट नहीं होता तो उनके एमबीबीएस में प्रवेश पाने की उच्च संभावना थी.

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