
विजयवाड़ा, 27 सितंबर . आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में ग्राम और वार्ड सचिवालय के कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर Sunday को किए गए प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों और Police के बीच झड़प हो गई.
अपनी मांगों को लेकर बुलाए गए ‘चलो विजयवाड़ा’ प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कर्मचारी, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, धरना चौक पर जमा हुए. इससे वहां तनावपूर्ण स्थिति बन गई.
कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए आंध्र प्रदेश Government से उन्हें पदोन्नति देने और उनकी अन्य लंबित मांगों को पूरा करने की मांग की. Police ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कोशिश की और उनमें से कुछ को उठाकर Police की गाड़ियों में बैठाया.
जब प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तारी का विरोध किया तो Police और कर्मचारियों के बीच झड़प हो गई. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए Police ने लाठीचार्ज किया. इस झड़प में कई प्रदर्शनकारी और Policeकर्मी घायल हो गए.
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेतृत्व वाली गठबंधन Government उनकी जायज मांगों के लिए आवाज उठाने वालों के खिलाफ दमनकारी कार्रवाई कर रही है.
धरना चौक पर ड्यूटी के दौरान सर्किल इंस्पेक्टर अहमद अली को दिल का दौरा पड़ा और वह जमीन पर गिर गए. अन्य Policeकर्मी उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले गए, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई.
इस बीच, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने अपनी उचित मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे ग्राम और वार्ड सचिवालय कर्मचारियों पर किए गए लाठीचार्ज की निंदा की.
वाईएसआरसीपी के एमएलसी लेल्ला अप्पी रेड्डी ने आरोप लगाया कि टीडीपी के नेतृत्व वाली गठबंधन Government अपने चुनावी वादों से पीछे हट गई है और प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के खिलाफ Police का इस्तेमाल कर रही है.
उन्होंने कहा, “कर्मचारी अपनी जायज मांगों के लिए लड़ रहे थे. Police ने ग्राम और वार्ड सचिवालय के नेताओं और प्रदर्शन में सक्रिय रूप से शामिल लोगों को रोकने में मनमानी की और धरना चौक पर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के साथ सख्ती से पेश आई.”
अप्पी रेड्डी ने कहा कि कई नेताओं को प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने से रोक दिया गया और जो लोग वहां पहुंचने में सफल रहे, उनके साथ Police ने मारपीट की.
उन्होंने कहा, “कम से कम 141 लोगों को हिरासत में लिया गया और राज्य Government उनसे बातचीत तक करने को तैयार नहीं है. Chief Minister एन. चंद्रबाबू नायडू और उनके बेटे नारा लोकेश बाहर थे, लेकिन एक भी मंत्री ने कर्मचारियों की समस्या को सुलझाने की जिम्मेदारी नहीं ली और उन्हें कानून लागू करने वाली एजेंसियों के भरोसे छोड़ दिया गया.”
अप्पी रेड्डी ने कहा, “कर्मचारी पदोन्नति और वेतन वृद्धि की मांग कर रहे थे, जो जायज मांगें हैं. Chief Minister चंद्रबाबू नायडू ने सत्ता में आने पर कर्मचारियों का वेतन दोगुना करने का वादा किया था, लेकिन वह अपना वादा पूरा नहीं कर पाए.”
उन्होंने कहा, “टीडीपी के नेतृत्व वाली गठबंधन Government अपने Political हितों के अनुकूल होने पर प्रदर्शनों को बढ़ावा देती है जैसा कि एसएएपी कार्यालय में हुआ था, लेकिन जब लोग अपनी जायज मांगों को लेकर वास्तव में प्रदर्शन करते हैं, तो उनके साथ सख्ती की जाती है. लोकतंत्र में इस तरह की कार्रवाई ठीक नहीं है.”
वाईएसआरसीपी एससी सेल के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक टीजेआर सुधाकर बाबू ने भी ग्राम और वार्ड सचिवालय कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की कड़ी निंदा की.
उन्होंने हिरासत में लिए गए सभी कर्मचारियों को बिना किसी शर्त के रिहा करने की मांग की. उन्होंने Police द्वारा लाठीचार्ज करने, कर्मचारियों को सड़कों पर घसीटने और महिला कर्मचारियों को Police थानों में हिरासत में रखने की आलोचना की.
सुधाकर बाबू ने कहा कि कर्मचारियों की पदोन्नति और दो लंबित वेतन वृद्धि सहित अन्य मांगें उचित हैं. उन्होंने कहा, “बातचीत के जरिए इन समस्याओं को हल करने के बजाय राज्य Government कर्मचारियों को परेशान कर रही है, उन पर जरूरत से ज्यादा काम का बोझ डाल रही है और उन्हें छुट्टियां भी नहीं दे रही है.”
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य Government ने पूर्व Chief Minister वाईएस जगन मोहन रेड्डी द्वारा महात्मा गांधी के ‘ग्राम स्वराज’ के सपने को साकार करने के लिए शुरू की गई सचिवालय व्यवस्था को कमजोर कर दिया है.
उन्होंने कहा, “इस व्यवस्था के जरिए लोगों को उनके घर तक 540 Governmentी सेवाएं उपलब्ध कराई गई थीं. कोविड-19 महामारी के दौरान अग्रिम मोर्चे पर काम करते हुए अपनी जान जोखिम में डालने वाले कर्मचारियों को अब अपमानित किया जा रहा है.”
उन्होंने 15,004 सचिवालयों को पुनर्गठित करके 7,715 समूहों में बदलने के फैसले की आलोचना की और आरोप लगाया कि राज्य Government करीब 30,000 कर्मचारियों को हटाने की योजना बना रही है.
–
एएमटी/वीसी