Skip to content
Friday, 16 October 2026
Hindi Daily Kiran India, Rajasthan, business, sports, tech और अन्य श्रेणियों की ताज़ा हिन्दी ख़बरें।
BREAKING
संस्कृति,राष्ट्रीय

गुजरात में आस्था और रोमांच का अनोखा संगम, कहीं आग वाली इंधोनी तो कहीं अंगारों के बीच स्वास्तिक रास

Gujarat में आस्था और रोमांच का अनोखा संगम, कहीं आग वाली इंधोनी तो कहीं अंगारों के बीच स्वास्तिक रास

राजकोट, 14 अक्टूबर . Gujarat में नवरात्रि का त्योहार केवल गरबा और डांडिया तक सीमित नहीं है बल्कि यहां कई ऐसी अनोखी परंपराएं भी देखने को मिलती हैं, जो लोगों को हैरान कर देती हैं. राजकोट और जामनगर में आयोजित होने वाले पारंपरिक रास में आस्था, साहस और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. कहीं युवतियां सिर पर जलती हुई इंधोनी और गरबे के घड़े रखकर नृत्य करती हैं, तो कहीं कलाकार जलते हुए अंगारों के बीच स्वास्तिक की आकृति में गरबा करते हैं.

राजकोट के मावड़ी चौक पर नवरात्रि के दौरान श्री बजरंग गरबी मंडल की ओर से आग वाली ‘इंधोनी रास’ प्रस्तुत की जाती है. यह 19 साल पुरानी परंपरा आज भी जीवंत है. इस रास में कलाकार सिर पर जलती हुई इंधोणी और गरबा के घड़े रखकर और हाथों में जलती हुई मशालें थामकर लगभग 20 मिनट तक लगातार गरबा करते हैं. आग के बीच संतुलन और लय को बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण है.

इस रास में हिस्सा लेने वाली एक युवती ने बताया, “हमें इस रास के लिए दो महीने से ज्यादा प्रैक्टिस करनी पड़ती है. मेरे माता-पिता को मुझ पर बहुत गर्व है और इसे करते समय हमें ऐसा लगता है जैसे देवी नवदुर्गा हमारे साथ ही नाच रही हों.”

वहीं, जामनगर में श्री रंडाल अंबिका कुमारिका गरबी मंडल की 52 साल पुरानी परंपरा नवरात्रि के उत्सव को और खास बनाती है. यहां का ‘स्वास्तिक अंगारा रास’ अपनी अनूठी शैली के लिए मशहूर है. इसमें पारंपरिक परिधानों में सजे युवा कलाकार जलती हुई लकड़ियों और अंगारों के बीच स्वास्तिक की आकृति बनाते हुए रास प्रस्तुत करते हैं.

इस रोमांचक प्रस्तुति को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक जुटते हैं. कई लोग आसपास की ऊंची जगहों पर खड़े होकर इस नजारे का आनंद लेते हैं. जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका सहित विदेशों से आए लोग भी इस परंपरा में दिलचस्पी दिखाते हैं.

गरबी मंडल के आयोजक सुरेश गोंडालिया बताते हैं कि उनके यहां पिछले 52 वर्षों से गरबी का आयोजन किया जा रहा है. स्वास्तिक रास के अलावा मशाल रास, सड़क तीन-तन्नी रास और डाकला रास जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियां भी इस उत्सव का हिस्सा हैं.

–

पीआईएम/पीएम

Share