आजम खान की दोबारा गिरफ्तारी पर नसीम सिद्दीकी बोले-देश में अघोषित इमरजेंसी, नाम देखकर हो रहा न्याय

Mumbai , 1 नवंबर . सपा नेता आजम खान की जेल से रिहा होते ही फिर गिरफ्तारी पर एनसीपी-एसपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने केंद्र Government पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि इस Government में देश में अघोषित इमरजेंसी लागू है. 24 घंटे के अंदर न्याय को पलट दिया जा रहा है.
नसीम सिद्दीकी ने कहा, “इस देश में अघोषित इमरजेंसी लागू है. एक तरफ अगर न्याय व्यवस्था किसी को न्याय देती है तो उसे 24 घंटे के अंदर दोबारा किस तरीके से सलाखों के पीछे भेजा जाए, उस बारे में पहले ही सोच लिया जाता है. यदि वह शख्स मुस्लिम समुदाय का है तो उसकी रिहाई से पहले ही उसकी गिरफ्तारी की सारी साजिशें मुकम्मल कर ली जाती हैं.”
उन्होंने कहा कि आजम खान को एक तरफ जमानत मिली, लेकिन दूसरी तरफ Government ने फिर से उन्हें वहीं भेजने का काम किया. यह अलोकतांत्रिक है, यह अन्याय है. यह अन्याय देश बहुत दिनों तक नहीं सहेगा. वो बिल्कुल सही कह रहे हैं. अगर यह प्रॉपर्टी किसी राम प्रसाद की होती, किसी आलोक कुमार की होती, किसी ज्ञानेश कुमार की होती तो न तो प्रॉपर्टी अटैच की जाती और न आजम खान को फिर से गिरफ्तार किया जाता. इस देश में नाम देखकर न्याय हो रहा है.
नसीम सिद्दीकी ने कहा कि जब से न्याय की देवी की आंखों पर से पट्टी हटी है, तब से न्याय देवी को भी अच्छी तरीके से मालूम पड़ जाता है कि आने वाला याचिकाकर्ता अब्दुल है, उमर खालिद है या फिर कोई रामचंद्र है. पट्टी खुलने के बाद वह ठीक ढंग से देखती हैं, निरीक्षण करती हैं, उसका गोत्र, जाति सब पूछती हैं और फिर अपनी धाराओं के हिसाब से उसको न्याय देती हैं.
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में अगर शरीयत, कुरान और हदीस का हवाला दिया जा सकता है तो हिंदू मिथकशास्त्र में, हिंदुओं के फैसले करने में, उनकी आस्था के फैसले करने में अगर गीता, रामायण और भगवद गीता का जिक्र होता है और उनका हवाला दिया जाता है, तो यह अच्छी बात है. वे हिंदू समाज के मार्गदर्शन के लिए ही बनाई गई हैं. तो कोई भी न्यायालय अगर उस धर्म के मार्गदर्शन के अनुसार निर्णय देता है तो मुझे इसमें कोई गलती नहीं लगती है. बिल्कुल हम हाईकोर्ट के उस फैसले का समर्थन करते हैं.
उन्होंने कहा कि चुनावों के नतीजे तो जनता के जरिए तय किए जाएंगे और जनता के अतिरिक्त अगर चुनाव आयोग, गृहमंत्री, Prime Minister उसकी घोषणा करता है कि चुनाव वही जीतेंगे तो इसका मतलब है कि दाल में कुछ काला है. चुनाव आयोग में कुछ सेट किया गया है, भविष्य में बेईमानी होने वाली है, चोरी और डकैती वोटों पर होने वाली है.
नसीम सिद्दीकी ने कहा कि इसलिए इस तरीके की भाषा लोकतंत्र में कोई चोर और डकैत ही इस्तेमाल कर सकता है. कोई ईमानदार आदमी नहीं कर सकता. जहां तक यूसीसी का सवाल है तो भाजपा इसको हिंदू राष्ट्र घोषित ही कर रही है और इस हिंदू राष्ट्र में वे तमाम चीजें, जो सनातनी हिंदू समाज के लिए हो सकती हैं, लागू की जा रही हैं तो यूसीसी कागजों पर नहीं है, समाज में और व्यवहार में, प्रदेशों में अभी यूसीसी तो लागू हो ही गया है.
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केके/वीसी


