अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के उम्मीदवारों का शानदार प्रदर्शन, कई ने दर्ज की जीत

वाशिंगटन, 4 नवंबर . अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनावों में भारतीय मूल के कई उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन किया. पांच भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट उम्मीदवारों ने यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अपनी सीटें पक्की कर लीं, जबकि छठी सीट भी उनकी पहुंच में दिखाई दे रही है. वहीं, लॉस एंजिलिस के मेयर चुनाव में भी भारतीय मूल की उम्मीदवार नित्या रमन बढ़त बनाती नजर आईं.
एबीसी-7 लॉस एंजिल्स की रिपोर्ट के अनुसार, लॉस एंजिलिस सिटी काउंसिल की सदस्य नित्या रमन ने मतगणना के दौरान मौजूदा मेयर करेन बास को पीछे छोड़ दिया. ताजा वोटों की गिनती के बाद रमन को 3,54,214 वोट (50.55 प्रतिशत) मिले, जबकि बैस को 3,46,513 वोट (49.45 प्रतिशत) मिले. हालांकि, मुकाबला अभी भी बेहद करीबी माना जा रहा था और अंतिम नतीजे का इंतजार था.
‘डिसीजन डेस्क एचक्यू’ के अनुसार, कांग्रेस चुनावों में भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट उम्मीदवार पिया डंडिया, सुहास सुब्रमण्यम, प्रमिला जयपाल, रो खन्ना और एमी बेरा को विजेता माना गया.
पिया डंडिया, जो पहले एक स्कूल प्रिंसिपल रह चुकी हैं और जिनके माता-पिता India से अमेरिका गए थे, ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल जिले में रिपब्लिकन उम्मीदवार कैसी अस्कार को हराया. उन्हें लगभग 52 प्रतिशत वोट मिले, जबकि अस्कार को 48 प्रतिशत वोट मिले.
वर्जीनिया में सुहास सुब्रमण्यम ने 10वें कांग्रेसनल जिले से दूसरी बार जीत हासिल की. उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराया और लगभग 61.5 प्रतिशत वोट प्राप्त किए.
अपनी जीत के बाद सुहास सुब्रमण्यम ने कहा, “चुनाव खत्म हो गया है, लेकिन असली काम अब शुरू होता है. मैं अपने समुदाय के साथ मिलकर वॉशिंगटन में बदलाव लाने के लिए काम करने को तैयार हूं.”
वॉशिंगटन राज्य में प्रमिला जयपाल ने 7वें कांग्रेसनल जिले से दोबारा जीत दर्ज की. वहीं, कैलिफोर्निया के 17वें जिले में रो खन्ना ने भारतीय मूल के रिपब्लिकन उम्मीदवार रितेश टंडन को हराया. कैलिफोर्निया के डेमोक्रेट नेता अमी बेरा ने भी नए परिसीमन के बाद बने तीसरे जिले से रिपब्लिकन रॉब टकर को हराकर एक और कार्यकाल सुनिश्चित किया.
इसके अलावा, एरिजोना के पहले कांग्रेसनल जिले में भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट अमिश शाह भी जीत की ओर बढ़ते दिखाई दिए. डॉक्टर और पूर्व राज्य विधायक रहे शाह को लगभग 54.6 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवार जे फीली को 43.5 प्रतिशत वोट मिले. हालांकि अंतिम घोषणा अभी बाकी थी.
पड़ोसी राज्य मैरीलैंड में भारतीय मूल की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने भी एक और चार साल का कार्यकाल सुनिश्चित किया. डेमोक्रेटिक गवर्नर वेस मूर की दोबारा जीत के साथ उनकी भी वापसी तय हो गई. विस्कॉन्सिन में अटॉर्नी जनरल जोश कौल, जिनके पिता भारतीय मूल के हैं, ने भी रिपब्लिकन उम्मीदवार एरिक टोनी को हराकर दोबारा जीत हासिल की.
राज्य विधानसभा चुनावों में भी भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने अच्छा प्रदर्शन किया.
टेक्सास में डेमोक्रेट उम्मीदवार पूजा सेठी ने हाउस डिस्ट्रिक्ट 47 में रिपब्लिकन जेनिफर मुशटेलर पर बड़ी बढ़त बनाई. 95 प्रतिशत से अधिक वोटों की गिनती के बाद उन्हें करीब 63.4 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी को 36.6 प्रतिशत वोट मिले. सेठी ने अपनी जीत का दावा भी कर दिया.
जॉर्जिया में डेमोक्रेट उम्मीदवार ज्योत सिंह ने हाउस डिस्ट्रिक्ट 97 में जीत का दावा किया. अनौपचारिक नतीजों के अनुसार उन्हें लगभग 68 प्रतिशत वोट मिले, जबकि रिपब्लिकन यासिन मोगाजी को करीब 32 प्रतिशत वोट मिले.
इलिनोइस में डेमोक्रेट नबीला सैयद ने सीनेट डिस्ट्रिक्ट 26 में रिपब्लिकन उम्मीदवार डार्बी हिल्स पर बढ़त बनाई. वहीं, राम विलीवलम ने इलिनॉय सीनेट की अपनी सीट बरकरार रखी और अरविंद वेंकट ने पेनसिल्वेनिया की प्रतिनिधि सभा में दोबारा जीत हासिल की.
रिपब्लिकन पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका ओहायो में लगा, जहां डेमोक्रेट उम्मीदवार एमी एक्टन ने गवर्नर चुनाव में भारतीय मूल के रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी को हरा दिया. रामास्वामी को President डोनाल्ड ट्रंप और उपPresident जेडी वेंस का खुला समर्थन प्राप्त था.
केरल के पलक्कड़ जिले से जुड़े परिवार से आने वाले विवेक रामास्वामी ने Tuesday देर रात अपनी हार स्वीकार कर ली.
न्यूयॉर्क में रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमाटिरेड्डी अटॉर्नी जनरल के चुनाव में मौजूदा डेमोक्रेट नेता लेटिशिया जेम्स से हार गईं. इसके अलावा महेश गनोरकर (नॉर्थ कैरोलाइना) और संदीप दीक्षित (ओहायो) को भी हार का सामना करना पड़ा.
तीन नवंबर को हुए ये चुनाव President डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बीच आयोजित किए गए थे. इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों, सीनेट की 35 सीटों, कई राज्यों के गवर्नर पदों तथा स्थानीय और राज्य स्तरीय पदों के लिए मतदान हुआ.
अमेरिका की राजनीति में भारतीय मूल के लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. इसकी शुरुआत 1957 में हुई थी, जब दलीप सिंह सोंध अमेरिका की कांग्रेस के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय मूल के व्यक्ति बने थे. आज भारतीय मूल के उम्मीदवार दोनों प्रमुख Political दलों की ओर से कांग्रेस, राज्य और स्थानीय स्तर के चुनावों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं.
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एवाई/डीकेपी


