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सुरक्षा में टू सैकेंड ऐप है सबसे खतरनाक

New Delhi, 12 अगस्त (उदयपुर किरण). सोशल मीडिया या फिर जितने भी ऐप इंसान की जानकारी या फिर सहूलियत के लिए बन रहे हैं, उतने ही इनका गलत इस्तेमाल हो रहा है. सबसे ज्यादा इनका गलत इस्तेमाल बड़े बदमाश, आतंकी और उनके आका कर रहे हैं. सुरक्षा एजेंसियों को इनको ट्रैस करने में बहुत ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं.

स्वतंत्रता दिवस में अब केवल दो दिन बाकी रह गए हैं. जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जिस तरह से सुरक्षा एजेंसियों को आतंकी गतिविधियों की सूचनाएं मिल रही हैं और सोशल मीडिया पर उनको ट्रेस करने की कोशिश भी की जा रही है. ऐसे में कुछ ऐसे ऐप भी हैं जो साइबर डिपार्टमेंट जिनको ट्रेस करने में हिम्मत तोड़ रहा है. ऐसे में इनको ट्रेस कर पकड़ने के लिए सुरक्षा एजेंसियां भी अपने मुखबिरों के भरोसे पर भी काम कर रही हैं.

पिछले कुछ समय से एक नया ऐप सामने आया है. जिसको ‘टू सैकेंड लाईन ऐप’ कहते हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया के आने के बाद यह बात सही है कि आतंकी व असमाजिक तत्व इसका इस्तेमाल करते हैं. जिससे सुरक्षा एजेंसियों को उनको पकड़ने में काफी परेशानी होती है.

कुछ ऐसे काम करता है ऐप

ऐप को डाउनलोड प्ले स्टोर से किया जाता है. डाउनलोड करते वक्त ही ऐप खुद ही कुछ नंबर दिखाता है. जिसमें से एक नंबर को आपको इस्तेमाल करना होता है. इसके बाद ऐप इस्तेमाल करने वाले का ई मेल और मोबाइल नंबर मांगता है. उसी नंबर पर ओटीपी आता है. ओटीपी रिसीव होने के बाद ऐप शुरू हो जाता है. साइबर सेल के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यूएसए और कनाडा में आप अगर इस ऐप से फोन करते हैं तो कोई चार्ज नहीं लगता है. यूएस और कनाडा में जितने चाहे उतने टेक्स्ट संदेश बिल्कुल मुफ्त भेज सकते हैं. लेकिन बाकी देशों में ऐप के जरिये फोन करने पर एक रुपये 80 पैसे प्रति मिनट चार्ज लगता है.

बिना सिम का नहीं होता है ट्रेस

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस ऐप से कॉलिंग करने पर इसे ट्रेस कर पाना काफी मुश्किल होता है. जिसका फायदा आतंकी व बदमाश व उनके आका उठा रहे हैं. यह सुरक्षा के लिहाज से काफी खतरनाक ऐप है. आतंकी इसके अलावा वीडियो कॉलिंग और व्हट्सअप कॉलिंग का भी इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इनको पकड़ा नहीं जा सकता है. क्योंकि यह एप बिना सिम नंबर के इस्तेमाल किया जा सकता है.

टू सैकेंड लाइन एप ऐसे होता है इस्तेमाल

दिल्ली पुलिस का कहना है कि जिस तरह से हाल में नौ दिल्ली के टॉप गैंगस्टर के करीबी बदमाशों को पकड़ा है. वह भी इसी ऐप का इस्तेमाल कर रहे थे. जिनसे पूछताछ करने के बाद अब शक है कि तिहाड़ जेल में बंद और दूसरी जेलों में बंद बदमाश भी इसी ऐप का इसतेमाल जेल में बंद रहने के बावजूद छोटे फोन से कर रहे हैं. असल में फोन में इस ऐप का इस्तेमाल कर रहे कॉलर के नंबर को ट्रेस नहीं किया जा सकता है. क्योकि फोन विदेश से आया था या फिर देश से यह पता नहीं चल पाता है क्याेकि कॉलर का नंबर जब भी दूसरे फोन पर आता है. उसमें यूएसए और कनाडा का कोड दिखता है. शुरूआत में एजेंसियां यहीं समझती थी कि फोन विदेश से आया है.

साइबर सेल को सोशल मीडिया पर संदिगधों की तलाश

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और साइबर सेल के अलावा सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया जिसमें फेसबुक, टविटर, इंस्टाग्राम जैसे कई ऐप हैं जिनको 24 घंटे खंगाला जा रहा है. फेसबुक पर आंतकवादियों की वेबसाइड पर कई बार कोडिंग में कुछ अहम जानकारियों मिल जाती है. पिछले दो  महीने से कुछ जानकारी मिली हैं. जिनके बारे में पता लगाने की कोशिश की जा रही हैं.

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