Tuesday , 27 October 2020

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा और रोजगार में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण का प्रावधान पर रोक

नई दिल्ली (New Delhi) . उच्चतम न्यायालय ने शिक्षा और रोजगार में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण का प्रावधान करने संबंधी महाराष्ट्र (Maharashtra) सरकार (Government) के 2018 के कानून के अमल पर बुधवार (Wednesday) को रोक लगा दी.लेकिन स्पष्ट कर दिया कि जिन लोगों को इसका लाभ मिल गया है उन्हें परेशान नहीं किया जायेगा. न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट की पीठ ने मामले को वृहद पीठ का सौंप दिया.

जिसका गठन प्रधान न्यायाधीश (judge) एस ए बोबडे करने वाले है. इन याचिकाओं में शिक्षा और रोजगार में मराठा समुदाय के लिये आरक्षण का प्रावधान करने संबंधी कानून की वैधता को चुनौती दी गई है. शीर्ष अदालत ने कहा कि 2018 के कानून का जो लोग लाभ उठा चुके हैं उनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जायेगा. महाराष्ट्र (Maharashtra) सरकार (Government) ने मराठा समुदाय में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिये शिक्षा और रोजगार में आरक्षण कानून, 2018 में बनाया था. बंबई उच्च न्यायालय ने पिछले साल जून में इस कानून को वैध ठहराते हुए कहा था कि 16 प्रतिशत आरक्षण न्यायोचित नहीं है और इसकी जगह रोजगार में 12 और प्रवेश के मामलों में 13 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं होना चाहिए.