Monday , 30 March 2020
विचार-मंथन / अपराजित योद्धा की चौथी बार शपथ : सिद्धार्थ शंकर

विचार-मंथन / अपराजित योद्धा की चौथी बार शपथ : सिद्धार्थ शंकर


आखिरकार एक अपराजित योद्धा की तरह चौथी बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री (Chief Minister) के रूप में शिवराज सिंह चौहान ने शपथ ली. शिवराज सिंह ने प्रथम बार सीधे मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद की शपथ 29 नवंबर 2005 को ली, दूसरी बार 12 दिसंबर 2008 को तथा तीसरी बार 14 दिसंबर 2013 को मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद की शपथ ली. पहली बार से दूसरी बार एवं दूसरी बार से तीसरी बार वे अत्यंत आत्मविश्वास के साथ प्रदेश की जनता की सेवा में जुटे रहे और प्रदेश में मामा के रूप में लोकप्रियता हासिल की. प्रदेश की समृद्धि के लिए, जनता की खुशहाली के लिए उन्होंने कई योजनाएं बनाईं.

उनकी सबसे प्रमुख योजना लाडली लक्ष्मी योजना थी, जिसका सपना उन्होंने अपने जीवन के पूर्वार्ध में देखा था. एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना तीर्थ दर्शन योजना उनके कार्यकाल में बनी, जिसमें बुजुर्गों को तीर्थ स्थल पर पहुंचा कर ईश्वर के दर्शन करा कर वापस अपने घर लाना था. यह दोनों योजनाएं इस प्रकार की थी कि उन्हें कन्याओं की जो मातृ स्वरूपा रहती हैं तथा बुजुर्गों की जो कि आशीर्वाद देने के लिए दोनों हाथों से तैयार रहते हैं, उनके आशीष इस प्रकार से लिए जैसे श्रवण कुमार ने अपने माता पिता से लिए थे.

अन्य कई योजनाएं जिनमें 0 फीसदी ब्याज पर किसानों को कर्ज, पढऩे वाले बच्चे-बच्चियों को मुफ्त साइकल वितरण, विदेश में जाकर पढ़ाई करने हेतु ऋण, साथ ही मुख्यमंत्री (Chief Minister) स्वेच्छानुदान से बीमारों की इलाज की सुविधा तथा अन्य अनेक योजनाएं उन्होंने अपने कार्यकाल में प्रारंभ की. इसके बावजूद तीसरे कार्यकाल के समाप्त होने के पश्चात 2018 में वह नियति के चलते लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद की शपथ नहीं ले सके. हालांकि उस समय भाजपा को बहुमत के लिए मात्र 4-5 सीट की ही कम थी.

लेकिन उसके बाद के कांग्रेस शासनकाल के लगभग 15 महीने में वह सोने की तरह तपते रहे और एक खरे सोने के रूप में उभर कर सामने आए. कमलनाथ सरकार की जो नाकामियां थीं उनको सामने लाकर और ज्योतिरादित्य सिंधिया को साथ लेकर आगे बढ़े और उसका नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार अपने अंदर के गुटों से संघर्ष करते-करते खुद ही अपदस्थ हो गई. अंतत: एक अभूतपूर्व अपराजित योद्धा की तरह पार्टी के नेता पद पर चुने जाकर उन्होंने पुन: चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद की शपथ ली.

अभी जो चुनौतियां शिवराज के समक्ष हंै उनमें सबसे प्रमुख चुनौती कोरोना (Corona virus) से प्रदेश की जनता को बचाने की है और उन्होंने शपथ लेते ही इस दिशा में काम प्रारंभ कर दिया. सर्वप्रथम लोगों को यह विश्वास दिलाया है कि मैं हूं और आपको कोरोना (Corona virus) से डरने की आवश्यकता नहीं है. वैसे चुनौतियां उनके समक्ष और भी हैं जिनमें सबसे बड़ी चुनौती खजाने को लेकर है, लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि अब केंद्र की भाजपा सरकार से उनको पूरी मदद मिलेगी और पूरा पोषण मिलते हुए वह इस चुनौती से पार पा जाएंगे. इसके अतिरिक्त अन्य और भी कई समस्याएं कर्मचारियों की, किसानों की, मजदूरों की सामने मुंह बाए खड़ी हैं लेकिन क्योंकि वह एक खरा सोना (Gold) बनकर निखर कर सामने आए हैं अत: इसमें कोई शक नहीं कि वह इन चुनौतियों को भलीभांति परास्त कर प्रदेश में नया इतिहास रचेंगे.

इसके अलावा राजनीतिक चुनौती भी उनके समक्ष आने वाली है वह है रिक्त हुई विधानसभा की सीटों पर भाजपा के प्रत्याशियों को जीत दिलाना. पूर्व के अनुभवों को देखते हुए यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि वह इस चुनौती को भी स्वीकार करेंगे और अपने उम्मीदवारों को निश्चित रूप से जिताकर विधानसभा में विधायक की शपथ दिलवाने में कामयाब होंगे.

अब आने वाला समय बताएगा कि चौथी बार की शपथ लेने वाले शिवराज सिंह चौहान अपराजित अजेय और अभूतपूर्व योद्धा के रूप में अपने आप को किस प्रकार से स्थापित करते हैं और जन आकांक्षाओं की पूर्ति करते हुए प्रदेश की जनता के दिलों में किस हद तक छाप छोड़ पाते हैं.