Saturday , 16 January 2021

भांग की खेती के लिए पीएम मोदी ने दिया स्टार्टअप


जबलपुर (Jabalpur) . अनाज की खेती करने वाले किसानों के प्रति मोदी सरकार का रुख भले ही स्पष्ट न हो लेकिन भांग की खेती के लिए मोदी सरकार लोगों को प्रोत्साहित कर रही है. हालहीं में आए कृषि कानून जिसे किसानों द्वारा काला कानून बताया जा रहा है इसे लेकर भले ही देश भर के किसान आंदोलन कर रहे हों लेकिन शहर की एक 72 वर्षीय महिला प्राचार्य ने जब उत्तराखंड में 5 एकड़ की भूमि पर भांग की खेती पर स्टार्टअप मांगा तो मोदी सरकार द्वारा उन्हें हाथों हाथ लिया गया. उत्तराखंड में 5 एकड़ में सफल परीक्षण के बाद अब 20 एकड़ में भांग की खेती की तैयारी के साथ उद्यमी वृद्ध महिला ने मप्र के सीएम शिवराज सिंह चौहान से प्रदेश में भी इसकी मांग की है. पीएम मोदी की हरी झंडी के बाद उम्मीद की जा रही है कि सीएम शिवराज सिंह चौहान भी भांग की खेती को हरी झंडी दे सकते हैं और प्रदेश भर में अनाज की खेती कर लगातार शोषण के शिकार हो रहे किसानों को शायद भांग की खेती मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है. अब अनाज उत्पादन करने वाले किसानों के भांग से स्टार्टअप करने से यदि अनाज की कमी होती भी है तो आयात कर समस्या को निराकृत किया जा सकता है. इससे पूरी तरह देश में पैर पसार चुकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की दाल रोटी भी चलती रहेगी.

केंद्र सरकार (Central Government)ने भांग पर र्स्टाटअप पर दिया अनुमोदन

अभी तक सिर्फ नशे के लिए इस्तेमाल होने वाला भांग कितना उपयोगी हो सकता है, ये संस्कारधानी जबलपुर (Jabalpur) (Jabalpur)की शांति नगर निवासी 71 वर्षीय विजयलक्ष्मी अवस्थी ने न सिर्फ समझा बल्कि केंद्र सरकार (Central Government)को भी समझा दिया. बढ़ती उम्र के साथ युवा सोच लिए विजयलक्ष्मी अपनी दो महिला सहयोगियों के साथ मिलकर भांग के पौधों और बीजों से निकलने वाले तेल और रेशे से मेडिसिन के साथ न्यूट्रासूटिकल फील्ड में कुछ बेहतर करना चाह रही हैं. वे कैंसर, अल्जाइमर, पार्किन्सन और अन्य मनोरोगों से पीडि़त मरीजों के दर्द को कम करने के लिए भांग और उसके पौधे पर लगातार रिसर्च कर रहीं हैं इसके लिए उन्होंने उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में 5 एकड़ लेकर भांग की खेती के लिए लाइसेंस लिया और स्टार्टअप के लिए आवेदन किया. मोदी सरकार के वाणिज्य और व्यापार मंत्रालय ने उनके इस अनोखे स्टार्टअप को स्वीकार करते हुए प्रमाणिकता का प्रमाणपत्र प्रदान कर उनके हौसले को बढ़ावा दिया है.

असाध्य रोगों के लिए वरदान होगा स्टार्टअप

श्रीमती अवस्थी का कहना है कि भांग का पौधा स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी गुणकारी है. इसमें कई औषधीय गुण भी मौजूद होते हैं कई असाध्य बीमारियों में इसका बेहतर उपयोग हो सकता है. उनका कहना है कि अधिकतर लोग भांग के पौधों से नशे के लिए उपयोग करते हैं, जो गलत है, भांग से पच्चीस हजार तरह के उत्पाद बनाये जा सकते हैं. भांग के नर पौधों की पत्तियों को सुखाकर भांग बनाया जाता है. प्राचीन काल से ही भांग का उपयोग हम नशे के अलावा औषधीय तौर पर भी करते आए हैं. समय के साथ आने वाली पीढ़ी भांग के पौधों के औषधीय गुणों से अनभिज्ञ होती जा रही हैं. आयुर्वेद, भांग को वनस्पतियों से प्राप्त औषधियों का राजा मानता है. भांग का पौधा हमें अनेक उत्पाद तैयार करने में मदद करता है. श्रीमती अवस्थी जो खुद वनस्पति विज्ञान में स्नातकोत्तर हैं, उन्होनें भांग के पौधे में असीम संभावनाएं देखीं है और तय किया कि वे भांग से न्यूट्रासूटिकल और दवाएं बनाएंगी वे और अधिक बेहतर काम करने के लिए लगातार रिसर्च भी कर रही हैं.

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