Friday , 14 May 2021

बैंकों में लगातार घटा बैड लोन बढऩे का रिस्क

मुंबई (Mumbai) . बैंकों का ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग एसेट रेशियो सितंबर 2020 के अंत में 7.5 पर्सेंट रह गया जो इसी साल मार्च के अंत में 8.2 पर्सेंट और पिछले साल मार्च के अंत में 9.1 पर्सेंट रहा था. इसका मतलब यह हुआ कि इस दौरान बैंकों के जिन लोन का ब्याज 90 दिन से ज्यादा समय से बकाया है, उनका प्रतिशत बैंकों के कुल लोन के मुकाबले घटा है. रेशियो में कमी आने का जिक्र रिजर्व बैंक (Bank) ऑफ इंडिया ने 29 दिसंबर को जारी अपनी रिपोर्ट ऑन ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया 2019-20 में किया है. रिजर्व बैंक (Bank) का कहना है कि पब्लिक सेक्टर बैंकों के रिकैपिटलाइजेशन (बैंकों को अपनी पूंजी का स्तर बासेल के नियमों में तय लेवल से ऊपर रखने के लिए सरकार ने अतिरिक्त पूंजी दी है) के साथ ही पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बैंकों के बाजार से पूंजी जुटाने के चलते बैंकों का कैपिटल टु रिस्क वेटेड एसेट रेशियो सितंबर 2020 के अंत में 15.8 पर्सेंट हो गया.

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