Sunday , 25 August 2019

फर्जी लाइसेंस जारी करने में आरोपित असलहा लिपिक ने खाया जहर

Kanpur, 13 अगस्त (उदयपुर किरण). फर्जी लाइसेंस जारी करने के आरोपित लिपिक ने जांच कमेटी के सामने बयान देने से पूर्व जहरीला पदार्थ खा लिया. तबियत बिगड़ने पर उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया. जहां से डॉक्टरों ने इलाज के बाद नाजुक हालत में लिपिक को हैलट अस्पताल रेफर कर दिया. भर्ती लिपिक को देखने जिलाधिकारी व एडीएम सिटी पहुंचे और हालचाल लिया.

कलेक्ट्रेट में कार्यरत लिपिक विनीत व सहयोगी संजय मौजूदा समय में असलहा विभाग में तैनात है. लिपिक विनीत व उसके सहयोगी द्वारा हाल ही में फर्जी लाइसेंस बनाये जाने की जानकारी पर जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत ने दोनों को हटाते हुए विभागीय जांच शुरु कराई. आरोप लगते ही लिपिक विनीत फरार हो गया. इसको लेकर उसके घर पर नोटिस चस्पा कर दी गई. जबकि घरवालों ने नौबस्ता थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज करा दिया.

जिलाधिकारी ने प्रकरण में अफसरों से लेकर लिपिकों की भूमिका की जांच मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को दी. मंगलवार को जांच कमेटी के सामने आरोपित लिपिक को बयान दर्ज कराने आना था, लेकिन इस बीच अचानक नाटकीय ढंग से फरार लिपिक विनीत जहरीला पदार्थ खाने के बाद सामने आया. परिजनों ने उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया. जहां जिलाधिकारी सहित अन्य अफसर आरोपी लिपिक को देखने पहुंचे. इलाज के दौरान हालत बिगड़ने पर लिपिक को हैलट अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया. जहां जिलाधिकारी व सीडीओ ने पहुंचकर डॉक्टरों से उसका हालचाल जाना. जनपद में फर्जी असलहा जारी होने के साथ विभागीय लिपिक के जहर खाने का मामला दिनभर जिला प्रशासनिक कार्यालय में चर्चा का विषय बना रहा.

इस तरह से हुआ था फर्जी लाइसेंस जारी

कलेक्ट्रेट में असलहा विभाग द्वारा कुछ समय पूर्व फर्जी तरीके से विरासत के तीन व छह नये लाइसेंस फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाये गये. गोपनीय जांच में सामने आया कि इनमें विरासत लाइसेंस के लिए नौबस्ता निवासी 67 वर्षीय संध्या सिंह ने उम्र का हवाला देते हुए अपने तीनों लाइसेंस बेटे मृत्युंजय के नाम ट्रांसफर करने का आवेदन किया. जांच में खुलासा हुआ कि आवेदनकर्ता के नाम पर कभी असलहों का लाइसेंस जारी ही नहीं हुआ था. उनके नाम से फर्जी आवेदन कराकर तीनों लाइसेंस मृत्युंजय के नाम पर जारी हुए और उसने तीनों असलहे भी खरीद लिए.

इसी तरह कलेक्ट्रेट से ही बगैर किसी आवेदन के छह फर्जी असलहा लाइसेंस जारी हुए. जारी लाइसेंस में न ही कोई आवेदन किया, न पुलिस वेरीफिकेशन हुआ और न ही जिलाधिकारी के सामने लाइसेंस का कोई भी आवेदन गया. इन सभी को सीधे फर्जी लाइसेंस की सिटी मजिस्ट्रेट और एडीएम सिटी के हस्ताक्षर वाली बुकलेट जारी कर दी गई. गोपनीय जांच में जिलाधिकारी के सामने चौंकाने वाले बात यह आई कि यह पूरा गिरोह कलेक्ट्रेट में सक्रिय है और इसमें अफसर भी शामिल हैं. प्रकरण में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर जिलाधिकारी ने लिपिक विनीत व संजय को असलहा विभाग से हटाते हुए विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए.

 

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