Thursday , 29 July 2021

प्रवासी बंगालियों से मतदान की अपील करेंगे भाजपा

भोपाल (Bhopal) . भाजपा को वोट देने के लिए मप्र में रह रहे प्रवासी बंगालियों को पार्टी के नेता मनाएंगे. इसके लिए भाजपा के नेता सक्रिय हो गए हैं. दरअसल, भाजपा को उम्मीद है कि मप्र में रह रहे लाखों बंगाली प. बंगाल चुनाव में उनका साथ देंगे. इसलिए पार्टी के पदाधिकारी प्रवासी बंगालियों को प. बंगाल जाकर चुनाव में मतदान करने की अपील करेंगे.

दरअसल, हर चुनाव में चुनाव आयोग की मंशा रहती है कि शत-प्रतिशत मतदान हो,लेकिन पश्चिम बंगाल (West Bengal) में हो रहे विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में मप्र में रह रहे प्रवासी बंगालियों की कोई दिलचस्पी नहीं है. इसकी वजह आर्थिक तंगी बताया जा रहा है. क्योंकि परिवार की हालत खस्ता होने से वो यहां से अब वापस वोट डालने नहीं जाना चाहते हैं. पूरे मप्र में बंगाली लोगों की संख्या लाखों में है. ऐसे में ये संख्या सरकार बनाने बिगाडऩे में अहम भूमिका निभा सकते हैं. इसीलिए कांग्रेस और भाजपा की निगाहें इन बाहरी वोटरों पर लग गई हैं. इन लोगों को अब खुद भाजपा के बड़े नेता मनाएंगे.

एक एक वोट पर नजर

पश्चिम बंगाल (West Bengal) विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में मतदान की तारीख जैसे जैसे नजदीक आती जा रही है, सियासी दलों की धड़कन बढ़ती जा रही हैं. भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा का प्रश्न बने इस चुनाव में दोनों दलों की एक एक वोटर पर नजर है. यही वजह है कि भाजपा, तृृणमूल कांग्रेस के अलावा कांग्रेस भी हर एक वोटर को साधने में लगी है. लेकिन मप्र में रोजी रोटी कमा रहे सोने चांदी (Silver) और मूर्तियां बनाने वाले प्रवासी बंगाली कारीगरों को अपने प्रदेश के चुनाव में कोई दिलचस्पी नहीं है. इसकी वजह पैसा बताया जा रहा है.

3 महिने पहले घर से लौटे

पिछले करीब एक साल से बेरोजगारी की मार झेल रहे ये कारीगर अभी तीन महिने पहले बंगाल से लौटे हैं. इनमें से अधिकतर कारीगर भोपाल (Bhopal) , इंदौर (Indore) के साथ ही प्रदेशभर के सर्राफा बाजार में सोने चांदी (Silver) के आभूषण बनाते हैं. अभी 22 अप्रैल से शादियों का सीजन शुरू होने जा रहा है. गहनों और सोने चांदी (Silver) के बर्तन बनाए जा रहे हैं. यही वजह है कि वो वोट डालने नहीं जाना चाहते हैं.

मंदी के दौर में चुनाव से दूरी

भोपाल (Bhopal) में रह रहे लोग बंगाल चुनाव में हिस्सेदारी तो करना चाहते हैं लेकिन उनकी अपनी मजबूरी है. इस बार कोरोना के कारण दुर्गा और गणेश प्रतिमाओं से भी उनकी कमाई नहीं हुई. इस बार कोरोना के साथ-साथ होलिका अष्टक लगने से विवाह के शुभ मुहुर्त बहुत कम हैं. गिनी चुनी शादियां हो रही हैं ऐसे में बंगाली कारीगरों के सामने आर्थिक संकट के हालात हैं. यही वजह की हम लोगों ने चुनाव से दूरी बना रखी है.

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