Saturday , 15 May 2021

पूर्व कुलपति समेत 20 प्रोफेसरों को दी क्लीनचिट

भोपाल (Bhopal) . आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने राजधानी ‎स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बीके कुठियाला समेत संबंधित 20 प्रोफेसरों को क्लीनचिट दे दी है. इन लोगों पर लगाए आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं. यही वजह है ‎कि ईओडब्ल्यू ने उन्हें क्लीनचिट देते हुए जिला कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट लगाई है. इसमें कहा गया है कि इन लोगों के खिलाफ साक्ष्य नहीं मिलने से आरोप साबित नहीं हुए. कमल नाथ सरकार के कार्यकाल में रजिस्ट्रार दीपेंद्रसिंह बघेल की जांच रिपोर्ट पर ईओडब्ल्यू ने इनके खिलाफ मामला दर्ज किया था.

कुठियाला से कई बार पूछताछ भी की गई. हालांकि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया था. जनवरी 2010 को कुठियाला की नियुक्ति की गई थी. उन पर आरोप थे कि आठ साल तीन महीने के कार्यकाल में कई लोगों को फायदा पहुंचाया. अपनी लंदन की यात्रा के दौरान पत्नी को भी विवि के खर्च पर यात्रा कराई. यह राशि बाद में समायोजित की गई. विवि के खर्च पर कई जगह जाकर नियमों का उल्लंघन किया. सर्जरी के लिए 58,150 रुपये, आंख के ऑपरेशन के लिए 1,69,467 रुपये का भुगतान विवि से किया गया. लैपटॉप, आइ-फोन की खरीदी की गई. कुठियाला हरियाणा (Haryana) में उच्च शिक्षा से संबंधित पद पर भी रहे हैं.

पूर्व कुलप‎ति कुठियाला के अलावा डॉ. अनुराग सीठा पर फर्जी तरीके से नियुक्ति पाने का आरोप, डॉ. पी. शशिकला पर तीन बार पदोन्नत‍ि देने, डॉ. पवित्र श्रीवास्तव को कुठियाला के कार्यकाल में प्रोफेसर बनाने, डॉ. अविनाश वाजपेयी पर पर्यावरण में पीएचडी और प्रबंधन विभाग में प्रोफेसर और विभाग अध्यक्ष बनने, डॉ. अरुण कुमार भगत पर भोपाल (Bhopal) कैंपस लाया गया, लेकिन दो साल के लियन पर दिल्ली लौटे, प्रो. संजय द्विवेदी- बिना पीएचडी प्रोफेसर बनने. डॉ. मोनिका वर्मा को नोएडा (Noida) कैंपस भेजने. अनुभव कम होने के बाद भी पहले रीडर फिर प्रोफेसर बनाने, डॉ. कंचन भाटिया को फर्जी नियुक्ति देने, डॉ. मनोज कुमार पचारिया को फर्जी नियुक्ति का आरोप, आरती सारंग को योग्यता नहीं होने के बाद भी प्रोफेसर की रैंक देने, डॉ. रंजन सिंह को आरक्षण के तहत गलत तरीके से नियुक्ति देने, सुरेंद्र पाल को तबादला नोएडा (Noida) कैंपस में किया गया और गलत तरीके से आरक्षण का लाभ देने, डॉ. सौरभ मालवीय को विवादित तरीके से नियुक्ति देने, सूर्य प्रकाश को नियमों के खिलाफ नियुक्ति में आरक्षण का लाभ देने, प्रदीप कुमार डहेरिया पर विवि में काम करते हुए पत्रकारिता की नियमित डिग्री लेने. सतेंद्र कुमार डहेरिया पर बिना स्टडी लीव लिए पत्रकारिता की डिग्री लेने, गजेंद्र सिंह अवश्या पर नौकरी के दौरान डिग्री लेने, डॉ. कपिल राज चंदोरिया पर डिग्री संदिग्ध होने का आरोप, रजनी नागपाल पर पत्रकारिता की डिग्री न होते हुए भी नियुक्ति देने का आरोप लगाया गया था जो ‎कि सिद्ध नहीं हुए हैं.

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