Friday , 16 April 2021

कोरोना मरीज पूरा नहीं कर रहे होम आइसोलेशन

भोपाल (Bhopal) . राजधानी में कोरोना मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा जा रहा है ले‎किन मरीज इसका पालन नहीं कर रहे हैं. इस तरह की दो से तीन शिकायतें रोजाना कंट्रोल रुम को ‎मिल रही है. मरीज अपने साथ-साथ दूसरों की ‎जिंदगी भी खतरे में डाल रहे हैं. डीआइजी बंगला क्षेत्र में स्थित ग्रीन कॉलोनी में एक युवक कोरोना से संक्रमित हुआ था. आसपास के लोगों को भी यह जानकारी थी. रविवार (Sunday) सुबह यह युवक दुकान में सामान खरीदने के लिए पहुंच गया. आसपास के लोगों ने उसे घूमता देख कोरोना कंट्रोल रूम को शिकायत की. कंट्रोल रूम से पुलिस (Police) और प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी गई. मौके पर टीम पहुंची तो युवक ने बताया कि उसकी कोरोना की जांच अब निगेटिव हो गई है, इसलिए होम आइसोलेशन से बाहर आ गया है. हर दिन इस तरह की दो-तीन शिकायतें कंट्रोल रूम को मिल रही हैं.

हालांकि, इस तरह से कोरोना की जांच कराने के बाद स्वास्थ्य विभाग की अनुमति के बिना होम आइसोलशन से बाहर आने वालों की हर दिन सख्या 8 से 10 के बीच रहती है, लेकिन सभी की शिकायतें नहीं पहुंच पातीं. गौरतलब है कि अब भी शहर में हर दिन कोरोना के डेढ़ सौ से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं. इसके बाद भी लोग लापरवाही करने बाज नहीं आ रहे हैं. सबसे ज्यादा खतरा होम आइसोलेशन वाले लोगों से है. उनकी ठीक से निगरानी नहीं हो रही है. ऐसे में वह खुद जांच कराने के बाद निगेटिव आने पर बाहर आना-जाना शुरू कर देते हैं. आसपास के लोग फोन कर कंट्रोल रूम को सूचित करते हैं. इसके बाद पुलिस (Police)-प्रशासन की टीम उन तक पहुंचती है.

नियमानुसार रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी कम से कम एक हफ्ते तक आइसोलेशन में रखना चाहिए, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है. बता दें कि शहर में 2040 सक्रिय मरीज हैं. इनमें 960 होम आइसोलेशन में हैं.इस बारे में सीएमएचओ, भोपाल (Bhopal) डॉ. प्रभाकर तिवारी का कहना है ‎कि मरीज की जानकारी लेने के लिए कई बार वाट्सएप पर वीडियो कॉल करते हैं, इससे पता चल जाता है कि मरीज कहां है. कई मरीज पकड़े जाने के डर से फोन ही नहीं उठाते.

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