Sunday , 18 April 2021

कोरोना के कारण टीबी-मलेरिया पर नियंत्रण का लक्ष्य पटरी से उतरा

नई दिल्ली (New Delhi) . स्वास्थ्य तंत्र के कोरोना महामारी (Epidemic) पर केंद्रित होने से टीबी और मलेरिया को साल 2030 तक काबू करने का वैश्विक लक्ष्य पटरी से उत्तर गया है. वैज्ञानिक अनुमान है कि अगले पांच सालों में टीबी से होने वाली मौतों में 20 और मलेरिया से मौतों में 36 फीसदी का इजाफा हो सकता है. देश में भी टीबी और मलेरिया के मामले ज्यादा हैं, इसलिए भारत पर भी यह खतरा मंडरा रहा है. लांसेट इंफेक्शियस डिजीज की रिपोर्ट के अनुसार सतत विकास के लक्ष्यों के तहत साल 2030 तक टीबी और मलेरिया के रोगियों में 80 फीसदी तथा मौतों में 90 फीसदी की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है. यह लक्ष्य साल 2015 में तय किए गए थे इसलिए यह कमी वर्ष 2015 के आंकड़ों के आधार पर ही की जानी है. लेकिन पिछले पांच सालों में उम्मीद के अनुरूप प्रगति नहीं हुई. कोविड महामारी (Epidemic) के बाद आने वाले समय में इन कार्यक्रमों पर पर्याप्त ध्यान केंद्रित होने के आसार हैं. रिपोर्ट के अनुसार उपरोक्त लक्ष्य के तहत साल 2020 तक दुनिया को टीबी के मामलों में 20 और मौतों में 25 फीसदी की कमी लानी थी. लेकिन मामले 9 फीसदी और मौतें 14 फीसदी ही घट पाई.

मलेरिया से मौतों में साल 2020 तक 40 फीसदी की कमी की जानी थी, लेकिन अब तक 10 फीसदी ही लक्ष्य हासिल हो पाया है. पिछले पांच सालों के दौरान भी मलेरिया की रोकथाम पर ज्यादा काम नहीं हुआ है. इस बीच अफ्रीका में मलेरिया के रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार साल 2020 में कोरोना महामारी (Epidemic) के दौरान टीबी और मलेरिया रोगियों के मौत के मामलों में बढ़ोतरी हुई है. इन बीमारियों के ज्यादातर मामले अफ्रीकी देशों तथा दक्षिण पूर्व एशिया में हैं. रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि 2025 तक टीबी से होने वाली मौतें 25 फीसदी बढ़ जाएंगी जबकि मलेरिया मौतें 36 फीसदी बढेंगी. वजह साफ है कि स्वास्थ्य सेवाओं का सारा फोकस कोविड महामारी (Epidemic) से निपटने में लगा है. इस साल ही नहीं बल्क आगामी वर्षों में भी कोविड की चुनौती बरकरार रहने की आशंका है.

Please share this news