कोरोनाकाल में महिलाओं के खिलाफ कम तो ऑनलाइन फ्रॉड, के अपराध बढ़े – Daily Kiran
Thursday , 28 October 2021

कोरोनाकाल में महिलाओं के खिलाफ कम तो ऑनलाइन फ्रॉड, के अपराध बढ़े

नई दिल्ली (New Delhi) . महामारी (Epidemic) कोविड-19 (Covid-19) के घातक वायरस के संक्रमण के चलते बीते साल 2020 में लॉकडाउन (Lockdown) के कारण लोगों का अधिकांश समय घर के अंदर बीता. पाबंदियां रहीं, वर्क फ्रॉम होम चलता रहा, सड़कें और बाजारों में हलचल काफी कम थी, पर ऐसे समय में भी देश में अपराध के मामले 28 प्रतिशत बढ़ गए. हालांकि इनमें ज्यादातर मामले कोविड-19 (Covid-19) के नियमों के उल्लंघन के थे. महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध घटा है. कोरोना काल में ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया (Media) पर फर्जी सूचना के मामले तेजी से बढ़े. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट में ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है.

गृह मंत्रालय (Home Ministry) के अधीन काम करने वाले एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि कोरोना महामारी (Epidemic) से प्रभावित साल-2020 के दौरान अपराध के मामलों में 2019 की तुलना में 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. साल 2020 में रोज औसतन 80हत्या (Murder) एं हुईं और कुल आंकड़ा 29,193 पहुंच गया. इस मामले में राज्यों की सूची में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) पहले नंबर पर है. यह ऐसे समय में था जब 25 मार्च 2020 से 31 मई 2020 तक कोविड-19 (Covid-19) महामारी (Epidemic) के कारण देश में लॉकडाउन (Lockdown) था.

पूरे देश में 2020 में बलात्कार के रोज औसतन 77 मामले दर्ज किए गए और कुल 28,046 मामले सामने आए. देश में ऐसे सबसे ज्यादा मामले राजस्थान (Rajasthan) में और दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में दर्ज किए गए. पिछले साल पूरे देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 3,71,503 मामले दर्ज किए गए जो 2019 में 4,05,326 थे और 2018 में 3,78,236 थे. साल 2020 में दर्ज किए गए कुल अपराधों में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188 के तहत लोक सेवकों द्वारा लागू व्यवस्था का उल्लंघन करने के मामले काफी ज्यादा थे. इस साल कुल 66,01,285 अपराध दर्ज किए गए जिसमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत 42,54,356 मामले और विशेष एवं स्थानीय कानून (एसएलएल) के तहत 23,46,929 मामले दर्ज किए गए.

आईपीसी की धारा 188 के तहत के तहत लोक सेवकों द्वारा लागू व्यवस्था का उल्लंघन करने को लेकर साल 2019 में 29,469 मामले दर्ज किए गए थे जो वर्ष 2020 में बढ़कर 6,12,179 हो गए. साल 2019 में भारतीय दंड संहिता से जुड़े अन्य अपराध के 2,52,268 मामले दर्ज किए गए थे जो 2020 में 10,62,399 हो गए. यह 2019 की तुलना में अपराध के दर्ज किए मामले में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दिखाता है. साल 2019 में 51,56,158 मामले दर्ज किए गए थे और साल 2020 में 14,45,127 मामले अधिक दर्ज किए गए. एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि अपहरण के मामलों में 2019 की तुलना में 2020 में 19 प्रतिशत की कमी आई है. 2020 में अपहरण के 84,805 मामले दर्ज किए गए जबकि 2019 में 1,05,036 मामले दर्ज किए गए थे. इसकी एक बड़ी वजह लॉकडाउन (Lockdown) और घर से बाहर न निकलना माना जा सकता है.

पिछले साल जिन लोगों कीहत्या (Murder) की गई थी उनमें से 38.5 प्रतिशत 30-45 वर्ष आयु समूह के थे जबकि 35.9 प्रतिशत 18-30 वर्ष आयु समूह के थे. मर्डर किए गए लोगों में 16.4 फीसदी 45-60 वर्ष की आयु वर्ग के थे और चार प्रतिशत 60 वर्ष से अधिक उम्र के थे जबकि बाकी नाबालिग थे. 2020 में अपहरण के सबसे ज्यादा 12,913 मामले उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में दर्ज किए गए. इसके बाद पश्चिम बंगाल (West Bengal) में अपहरण के 9309, महाराष्ट्र (Maharashtra) में 8103, बिहार (Bihar) में 7889, मध्य प्रदेश में 7320 मामले दर्ज किए गए. वहीं, राष्ट्रीय राजधानी में अपहरण के 4,062 मामले दर्ज किए गए हैं. एनसीआरबी ने कहा कि देश में अपहरण के 84,805 मामलों में 88,590 पीड़ित थे. इनमें अधिकतर यानी 56,591 पीड़ित बच्चे थे.

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