Tuesday , 7 July 2020
इलेक्ट्रॉन घनत्व की पूर्व सूचना देने वाले नए मॉडल से नौवहन को मिल सकती है सहायता

इलेक्ट्रॉन घनत्व की पूर्व सूचना देने वाले नए मॉडल से नौवहन को मिल सकती है सहायता


नई दिल्ली (New Delhi) . विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार (Government) के एक स्वायत्त संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जिओमैग्नेटिज्म (आईआईजी), नवी मुंबई (Mumbai) के शोधकर्ताओं ने संचार और नौवहन के लिए अहम माना जाने वाला व्यापक डाटा कवरेज के साथ आयनोस्फेरिक (आयनमंडलीय) इलेक्ट्रॉन घनत्व की पूर्व सूचना देने वाला एक वैश्विक मॉडल विकसित किया है.

डॉ. वी साई गौतम ने आईआईजी के अपने शोध पर्यवेक्षक डॉ. एस तुलसीराम के साथ दीर्घकालिक आयनमंडलीय अवलोकन का उपयोग करते हुए एक नए प्रकार का वैश्विक आयनमंडलीय मॉडल पर आधारित आर्टीफिशियल न्यूरल नेटवर्क (एएनएनआईएम) विकसित किया है, जिससे आयनमंडलीय इलेक्ट्रॉन घनत्व की पूर्व सूचना दी जाएगी और उच्च मापदंडों का अनुमान लगाया जाएगा. एएनएन पैटर्न की पहचान, वर्गीकरण, क्लस्टरिंग, सामान्यीकरण, रैखिक और गैर रैखिक डाटा फिटिंग और टाइम सीरीज के अनुमान जैसी समस्याओं के समाधान के लिए मानव मस्तिष्क (या जैविक न्यूरॉन्स) में होने वाली प्रक्रियाओं की जगह लेता है. अभी तक एएनएन के उपयोग से वैश्विक आयनमंडलीय परिवर्तनशीलता मॉडल तैयार करने की दिशा में बेहद कम प्रयास किए गए हैं.

संचार और नौवहन के लिए आयनमंडलीय परिवर्तनशीलता की निगरानी काफी अहम है. आयनमंडलीय परिवर्तनशीलता व्यापक स्तर पर सौर उत्पन्न और तटस्थ वातावरण में पैदा होने वाली प्रक्रियाओं दोनों के द्वारा प्रभावित होती है, इसलिए इसे मॉडल के रूप में स्वीकार किया जाना मुश्किल है. वैज्ञानिकों ने सैद्धांतिक और अनुभवजन्य तकनीकों के उपयोग से आयनमंडलीय मॉडल विकसित करने की कोशिश की है; हालांकि इलेक्ट्रॉक घनत्व का सटीक अनुमान लगाना अभी तक चुनौतीपूर्ण कार्य बना हुआ है.