Friday , 16 April 2021

आखिर ट्रंप ने 900 अरब डॉलर के कोरोना राहत पैकेज पर किए हस्ताक्षर

– इस बिल को नाकाफी बताते हुए भड़क गए अमेरिकी और कहा, इससे केवल ब्रेड आएगी

लॉस एंजलिस . अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने काफी टाल मटोल के बाद आखिर कोरोना (Corona virus) महामारी (Epidemic) से निपटने के लिए 900 अरब डॉलर (Dollar) के वैश्विक महामारी (Epidemic) राहत पैकेज पर हस्ताक्षर कर दिए. इस राशि का इस्तेमाल कोरोना (Corona virus) महामारी (Epidemic) के दौरान बुरी तरह प्रभावित हुए कारोबारियों एवं जरूरतमंद लोगों की मदद करने और टीका मुहैया कराने के अभियान में किया जाएगा. ट्रंप ने रविवार (Sunday) रात को इस संबंध में घोषणा की. इस पैकेज के तहत बेरोजगारों को हर हफ्ते 300 डॉलर (Dollar) और जरूरतमंद लोगों को 600 डॉलर (Dollar) की सहायता प्रदान की जाएगी. नए प्रावधानों के तहत सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले कारोबारों, स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं की भी मदद की जाएगी. डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यभार संभालने के बाद और राहत पैकेज दिए जाने का वादा किया है. करीब 2.3 ट्रिल्‍यन डॉलर (Dollar) के इस पैकेज के जारी होने से अब सरकार ठप्प होने और कोरोना महासंकट के बीच आर्थिक सहायता रूकने का खतरा खत्‍म हो गया है. उधर, इस बिल को नाकाफी बताते हुए अमेरिकी आक्रोशित हैं. उनका कहना है कि इससे केवल ब्रेड आएगी.

इससे पहले ट्रंप ने साल के आ‎खिर अंत वाले कोविड राहत एवं खर्च विधेयक पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया था. इससे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे लाखों अमेरिकी लोगों को मिलने वाला बेरोजगारी भत्ता लाभ शनिवार (Saturday) आधी रात से बंद हो गया.माना जा रहा था कि ट्रंप इस पर हस्ताक्षर कर देंगे लेकिन अचानक उन्होंने इस पर आपत्तियां जतानी शुरू कर दीं. ट्रंप ने कोविड राहत में अधिक राशि की मांग करते हुए तथा इस संबंध में अन्य सवाल उठाते हुए द्विपक्षीय पैकेज पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया था. विधेयक में अधिकतर अमेरिकियों के लिए 600 डॉलर (Dollar) के भुगतान के प्रावधान का प्रस्ताव किया गया है लेकिन ट्रंप ने कहा था कि वह संसद से इसमें संशोधन करने और एक दंपति के लिए 600 डॉलर (Dollar) जो कि अत्यंत कम राशि है, को बढ़ाकर 2000 या 4000 डॉलर (Dollar) करने को कहेंगे. हालांकि ऐसा हुआ नहीं और ट्रंप को बिल पर हस्‍ताक्षर करना पड़ा.

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