काजी नजरुल इस्लाम : वो कवि जो बगावत की आवाज बना, कामरेड से कवि और कवि से विद्रोही
New Delhi, 28 अगस्त . करीब 5 दशक पहले, 29 अगस्त 1976 को दुनिया ने उसे हमेशा के लिए खामोश होते हुए देखा, जिसने उपनिवेशवाद, असमानता और कट्टरता के खिलाफ कविता को हथियार बना दिया था. काजी नजरुल इस्लाम, जिन्हें लोग ‘विद्रोही कवि’ कहते हैं, वह सिर्फ एक कवि नहीं थे, बल्कि एक क्रांति थे. … Read more