Friday , 26 February 2021

24 घंटे में दुनियाभर में कोरोना के 3.42 लाख मामले आए, यूरोप में कोरोना की दूसरी लहर


वाशिंगटन . दुनियाभर में कोरोना का ग्राफ एक बार फिर बढ़ रहा है. गत दिवस दुनिया में पहली बार एक दिन में 3.42 लाख कोरोना मामले आए और 5882 मरीजों की जान गई. इससे पहले 2 अक्टूबर को एक दिन में सबसे ज्यादा 3.26 लाख मामले सामने आए थे. बीते 24 घंटे में भारत और अमेरिका के बाद ब्राजील, फ्रांस, अर्जेंटीना, इंग्लैंड, रूस और कोलंबिया में सबसे ज्यादा कोरोना मामले सामने आए हैं. वहीं सबसे ज्यादा मौत भारत में हुई है. सबसे ज्यादा प्रभावित देशों के मामले में भारत दूसरे स्थान पर आता है. दुनियाभर में अबतक 3 करोड़ 63 लाख लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं.इसमें से 10 लाख 59 हजार (2.92प्रतिशत) लोगों ने अपनी जान गंवा दी है.वहीं 2 करोड़ 74 लाख (75 प्रतिशत) से ज्यादा मरीज ठीक हो चुके हैं.

पूरी दुनिया में वर्तमान में 79 लाख से ज्यादा सक्रिय केस हैं, यानी कि फिलहाल इतने लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. यूरोप में भी फ्लू के मौसम की शुरुआत होने से पहले ही कोरोना के मामले फिर से जोर पकड़ने लगे हैं, जिसके कारण कई देशों में गहन चिकित्सा इकाइयों में मरीजों की संख्या पुन:बढ़ने लगी हैं. स्पेन ने कोरोना संक्रमण को काबू करने के कदमों को लेकर स्थानीय एवं राष्ट्रीय प्राधिकारियों के बीच तनाव के बीच इस सप्ताह मैड्रिड में आपातकाल घोषित कर दिया. जर्मनी ने संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित नए क्षेत्रों (हॉटस्पॉट) में संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने में जवानों की मदद की प्रशंसा की है.

वहीं इटली ने घर से बाहर मास्क पहनना अनिवार्य कर सचेत किया है कि महामारी (Epidemic) से कुछ हद तक उबरने के पश्चात पहली बार ऐसा हुआ है, जब स्वास्थ्य प्रणाली को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि अस्पतालों में मरीज बढ़ रहे हैं. चेक गणराज्य ने उस समय जून में संक्रमण को काबू करने में ‘‘सफल” रहने की खुशी में जश्न मनाया था, जब चार्ल्स ब्रिज के पास 500 मीटर लंबी मेज पर हजारों प्राग निवासियों ने भोजन किया था, लेकिन अब यहां यूरोप में सर्वाधिक प्रति व्यक्ति संक्रमण दर है. यहां हर एक लाख में से 398 लोग संक्रमित हैं. चेक गणराज्य के गृह मंत्री जान हामासेक ने स्वीकार किया कि हालात अच्छे नहीं है. रोम में इस सप्ताह लोगों को जांच कराने के लिए आठ से 10 घंटे पंक्तियों में खड़े रहना पड़ा और कीव से पेरिस तक चिकित्साकर्मियों को फिर से क्षमता से अधिक मरीजों वाले वार्डों में तय घंटों से अधिक समय तक काम करना पड़ा.

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