Tuesday , 13 April 2021

वकील के माध्यम से प्रतिनिधित्व कराने का अधिकार कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा


नई दिल्ली (New Delhi) . सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने कहा है कि किसी मामले में वकील के माध्यम से प्रतिनिधित्व कराने का अधिकार कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है. साथ ही कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रदद कर दिया. हाईकोर्ट ने 1987 के एक हत्या (Murder) मामले में व्यक्ति की अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने कहा था कि उसका वकील सुनवाई के दौरान मौजूद नहीं था. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) व्यक्ति के अपील को बहाल कर हाईकोर्ट से जल्दी किसी तारीख पर मामले को लेकर सुनवाई करने के लिए विचार करने को कहा है. साथ ही कोर्ट ने मामले किसी वकील द्वारा मामले में याचिकाकर्ता का प्रतिनिधिनत्व नहीं करने पर अदालत मित्र (एमीकस क्यूरी) नियुक्त करने का आदेश दिया है.

जस्टिस यूयू ललित की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि वकील के जरिए प्रतिनिधित्व कराने का अधिकार कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है. यह पूरी तरह से स्वीकार्य है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत इसका अधिकार है. पीठ में शामिल न्यायमूर्ति विनीत सरण और न्यायमूर्ति एस रविंद्र भट भी शामिल हैं. पीठ ने 18 दिसंबर के अपने आदेश में कहा कि मामले में आरोपी का प्रतिनिधित्व कर रहा वकील किसी वजह से उपलब्ध नहीं है तो अदालत अपनी सहायता के लिए एमीकस क्यूरी नियुक्त करने के लिए आजाद है, लेकिन किसी मामले में ऐसा नहीं होना चाहिए कि कोई उसका प्रतिनिधित्व न कर रहा हो.

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