Friday , 7 May 2021

रिपोर्ट तैयार करते वक्त सुप्रीम कोर्ट की समिति के सदस्यों की निजी राय रहेगी अलगः अनिल घनवट


नई दिल्ली (New Delhi) . कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) द्वारा गठित समिति के प्रमुख सदस्य अनिल घनवट ने मंगलवार (Tuesday) को कहा कि विभिन्न हितधारकों से कृषि कानून पर बातचीत करने के दौरान समिति के सदस्य अपनी निजी राय को हावी नहीं होने देंगे. उन्होंने जोर देकर कहा कि वे किसी पक्ष या सरकार के पक्ष में नहीं हैं. घनवट ने यहां हुई समिति की पहली बैठक के बाद कहा कि किसानों और अन्य हितधारकों के साथ पहली बैठक गुरुवार (Thursday) को प्रस्तावित है. उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने 11 जनवरी को चार सदस्यीय समिति का गठन किया था लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों ने नियुक्त सदस्यों द्वारा पूर्व में कृषि कानूनों को लेकर रखी गई राय पर सवाल उठाए. इसके बाद एक सदस्य भूपिंदर सिंह मान ने खुद को इससे अलग कर लिया है.

बता दें कि दिल्ली की सीमा पर हजारों की संख्या में किसान करीब दो महीने से नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.केंद्र सरकार (Central Government)और प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच भी नौ दौर की अलग से बात हुई थी लेकिन मुद्दे को सुलझाने की यह पहल बेनतीजा रही. घनवट जो शेताकारी संगठन के अध्यक्ष हैं, ने कहा कि समिति 21 जनवरी को किसानों और अन्य हितधारकों से पहले चरण की वार्ता करेगी. उन्होंने कहा, ‘समिति की सबसे बड़ी चुनौती प्रदर्शनकारी किसानों को हमसे बातचीत के लिए तैयार करने की होगी. हम इसका यथासंभव प्रयास करेंगे.’

घनवट ने कहा कि समिति केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा किसानों और सभी अन्य हितधारकों की कृषि कानूनों पर राय जानना चाहती है. उन्होंने कहा, ‘समिति के सदस्य उच्चतम न्यायालय में जमा करने के लिए रिपोर्ट तैयार करने के दौरान कृषि कानूनों पर अपनी निजी राय को अलग रखेंगे. मान के स्थान पर किसी अन्य को समिति में शामिल करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका गठन उच्चतम न्यायालय ने किया है और शीर्ष अदालत ही तय करेगी कि किसे नियुक्त करना है. घनवट ने कहा, हमें जिम्मेदारी दी गई है और हम उसका ठीक से निर्वहन कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, समिति के समक्ष आने को अनिच्छुक उन प्रदर्शनकारी किसानों से हम कहना चाहते हैं कि न तो हम किसी के पक्ष में है और न ही सरकार की ओर से हैं. हम सभी उच्चतम न्यायालय की ओर से हैं. प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों और विपक्षी पार्टियों द्वारा सदस्यों के सरकार समर्थक होने के आरोपों पर घनवट ने कहा, ‘आप हमारे पास बातचीत के लिए आइए. हम आपकी सुनेंगे और आपकी राय को अदालत के समक्ष रखेंगे. हम सभी से बातचीत करने का अनुरोध करते हैं.’

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