Friday , 16 April 2021

गंगा एक्सप्रेस-वे उन्नाव में सबसे लंबा मेरठ में मिलेगी सबसे महंगी जमीन

मेरठ (Meerut) . गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए सबसे महंगी जमीन मेरठ (Meerut) व प्रयागराज (Prayagraj)में मिलेगी. सबसे ज्यादा 1300 हेक्टेयर जमीन की जरूरत उन्नाव में पड़ेगी. उन्नाव में ही सबसे लंबा 105 किमी का एक्सप्रेस-वे बनेगा. नए साल में योगी सरकार की मेगा परियोजना गंगा एक्सप्रेसवे के लिए जमीन खरीदने का अभियान शुरू हो गया है.

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) 529 गांवों की 7800 हेक्टेयर जमीन खरीदी या अधिगृहित की जाएगी. इसके लिए 12 जिलों के जिलाधिकारियों से आगे की कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं. छह महीने में जमीन खरीदने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही पीपीपी मोड पर गंगा एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए निजी डवलपर की तलाश भी शुरू हो गई है. मेरठ (Meerut) में एक्सप्रेसवे 15 किमी लंबा होगा. यह बिजौली गांव से शाफियाबाद लौटी तक बनेगा. इस दरम्यान 8 गांव की 200 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी. इस पर 1575 करोड़ रुपये खर्च होंगे. यह सभी जिलों में जमीन पर खर्च होने वाली अधिकतम रकम है. सबसे कम 533 करोड़ रुपये हापुड़ में खर्च होंगे.

प्रयागराज (Prayagraj)में यह एक्सप्रेसवे खत्म होगा. यहां एक्सप्रेस-वे पश्चिमनारा से जुदापुर दांदू तक बनेगा. इसके बीच फासला 16 किमी का है. यहां केवल 19 गांवों की 210 हेक्टेयर जमीन चाहिए. इसकी अनुमानित लागत 1078 करोड़ रुपये है. एक दर्जन जिलों में उन्नाव ऐसा जिला है, जहां सबसे ज्यादा 105 किमी लंबा एक्सप्रेसवे बनेगा. इसके लिए जमीन भी सबसे ज्यादा 1380 हेक्टेयर चाहिए. जमीन अपेक्षाकृत सस्ती होने के कारण इस पर 625 करोड़ रुपये खर्च होंगे. यहां 83 गांव जमीन अधिग्रहण या क्रय अभियान के दायरे में आएंगे. गंगा एक्सप्रेसवे के लिए जमीन खरीदने का काम शुरू हो गया है. संबंधित 12 जिलों के डीएम से कहा गया है कि वह जमीन खरीदने संबंधी अधिसूचना जारी करें. शुरुआती खर्च के लिए 350 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं. जून तक जमीन खरीदने का काम हो जाएगा.

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