Friday , 16 April 2021

यात्रियों का जनसैलाब उमड़ा 1920 अर्ध भगवान को समर्पित किये

धार . आहु पार्श्वनाथ के इतिहास में पहली बार शुक्ल पक्ष मैं 16 दिवसीय शांति विधान का आयोजन मानव कल्याण और विश्व शांति हेतु 12 फरवरी से प्रारंभ हुआ शनिवार (Saturday) 27 फरवरी को विधान का समापन हुआ पुण्य कमाने के लिए भक्तों का जनसैलाब उमड़ा इन 16 दिनों में 1920 अर्ध भगवान को समर्पित किए प्रतिदिन 120 अर्ध चढ़ते थे साथ ही सुख शांति के लिए भगवान के मस्तक पर शांति धारा होती थी कोरोना के पुनः प्रकोप को शांत करने हेतु रोग निवारण के लिए महा हवन मंत्रोच्चारण के साथ किया गया शुक्ल पक्ष के 16 दिवसीय शांति विधान करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है.

प्रथम दिन के विधान के लाभार्थी पवन जैन गंगवाल दूसरे दिन के रमेश जी खाग तीसरे दिन के श्रीमती कलावती उज्जैन चौथे दिन के तरुण कुमार जी जैन इन्दौर (Indore) पांचवें दिन के चंद्रप्रकाश आहु छठे दिन के नरेंद्र जी पाटनी इन्दौर (Indore) सातवें दिन के दिलीप पाटोदी इंदौर (Indore) आठवें दिन के श्रीमती चंदा पापा लिया 9वे दिन के मनीष बड़जात्या खरगोन दसवें दिन के सम्यक जैन भोपाल (Bhopal) 11 दिन के शंभु झांझरी सोनकच्छ वाले 12 दिन के सुकुमाल जैन चुने वाले 13 दिन के विमल चंद जी जैन पंचायत 14 दिन के प्रेम पाटनी इन्दौर (Indore) 15 दिन के श्रीमती लीला जैन गंधवानी 16 दिन के राजेन्द्र गंगवाल इन्दौर (Indore) को प्राप्त हुआ इस दौरान भगवान विमलनाथ जी, अजीत नाथ जी, अभिनंदन जी, धर्म नाथ जी भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया 27 फरवरी को पूर्णिमा महोत्सव होने से तीर्थ पर मनोकामना युक्त पार्श्वनाथ विधान भी हुआ जिसका लाभ मोर्टका की श्वेता विकास कासलीवाल को मिला संपूर्ण विधि विधान पंडित अनुराग शास्त्री हीरापुर वाले सहयोगी पंडित उपदेश जी दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष अशोक कासलीवाल, हुकम कासलीवाल, अनुपम जैन, प्रीतम जैन, अजय बड़जात्या, हेमंत जैन, पारस गंगवाल, चंद्रप्रकाश गंगवाल, अशोक रावका रूपेश बड़जात्या, किशोर जैन, डॉ कमल, अशोक गंगवाल एवं पदमा गंगवाल, सुशीला जैन, साधना गंगवाल, ताराबाई आदि का सहयोग रहा. उपरोक्त जानकारी तुभ्यम व आशीष गंगवाल ने दी.

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